स्व सहायता समूह की महिलाओं पर बनाया दबाव, मिली धमकी, मंत्री सिसोदिया ने दिए ये आदेश

वहीं रायसेन कलेक्टर का कहना है कि शासन की प्रक्रिया के अनुसार ही कार्य किया जाएगा।

भोपाल/रायसेन, डेस्क रिपोर्ट। एक तरफ जहां प्रदेश के मंत्री (minister) स्व सहायता समूह (Self help group) में महिलाओं की भागीदारी पर विशेष ध्यान देने की बात कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ उनके अधिकारियों द्वारा महिलाओं को धमकी देकर मनमाफिक ठेकेदार से सामान खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। दरअसल प्रदेश में स्कूली बच्चे (government school) के गणवेश (dress) सिलने के लिए महंगा कपड़ा खरीदने के लिए महिलाओं पर दबाव बनाया जा रहा है वहीं जिन फर्मों से कपड़े खरीदने की बात की जा रही है। उनका गठजोड़ वरिष्ठ अफसरों के साथ बताया जा रहा है।

इतना ही नहीं अगर स्व सहायता समूह की महिलाएं महंगा कपड़ा खरीदने के लिए मना कर रही है तो उन्हें धमकी तक दी जा रही है। जिसके बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया (Mahendra Singh Sisodia)  ने रायसेन (raisen) जिले में निशुल्क गणवेश योजनाओं में अनियमितता की जांच कमिश्नर कवींद्र कियावत (Kavindra Kiyavat) को सौंपी है। रायसेन कलेक्टर उमाशंकर भार्गव (Raisen Collector Umashankar Bhargava) का कहना है कि स्व सहायता समूह की महिलाओं को कपड़ा बाजार से खरीदना है इसके लिए किसी विशेष फर्मों से कपड़े खरीदने का सवाल ही नहीं उठता। इस मामले की जांच की जाएगी और दोषी को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

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दरअसल आजीविका मिशन से जुड़े जिला और ब्लॉक प्रबंधक महिलाओं को धमकी देकर ठेकेदार से स्कूल बच्चे के गणवेश के लिए कपड़ा खरीदने का दबाव बना रहे हैं। इसके साथ ही महिलाओं को धमकी दी जा रही है कि कहीं और से खरीदी करने पर ड्रेस को रिजेक्ट किया जाएगा और इसके साथ ही साथ स्व सहायता समूह की महिलाओं के घर को बिकवाकर वसूली की जाएगी।

अब इस मामले के तहत रायसेन जिले में मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में पदस्थ जिला परियोजना प्रबंधक एम राजा (M Raja) के खिलाफ शिकायत की गई है। हालांकि इस मामले में एम राजा का कहना है कि उनके द्वारा सिर्फ स्व सहायता समूह की महिलाओं को खरीदने की प्रक्रिया के बारे में समझाया जाता है। उनका कहना है कि कपड़ा कहां से खरीदना है। इसका फैसला महिलाओं का ही होता है।

बता दें कि राज्य शासन द्वारा स्वयं सहायता समूह में महिलाओं की स्थिति को सुनिश्चित करने के लिए इस साल शासकीय विद्यालय के कक्षा 8वीं तक की निशुल्क गणवेश योजना के अंतर्गत महिलाओं को बच्चों के गणवेश सिलने की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसी स्थिति में मनचाही फर्मों द्वारा उचित दरों पर गुणवत्ताविहीन कपड़े की खरीदी के लिए महिलाओं पर दबाव बनाए जा रहे हैं। वहीं रायसेन कलेक्टर का कहना है कि शासन की प्रक्रिया के अनुसार ही कार्य किया जाएगा।

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