निकाय चुनाव 2021: राज्य सरकार ने हाईकोर्ट से मांगा समय, अब 26 अप्रैल को आरक्षण पर सुनवाई

ग्वालियर हाईकोर्ट

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में नगरीय निकाय चुनाव (Municipal Election 2021) कब होंगे, यह स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। आज सोमवार को ग्वालियर हाईकोर्ट (Gwalior Highcourt) में आरक्षण (Reservation) में रोटेशन प्रक्रिया को लेकर हुई सुनवाई में राज्य सरकार (MP Government) अपना जवाब पेश नही कर पाई और हाईकोर्ट से कुछ और दिन की मोहलत मांगी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 26 अप्रैल को को होगी।इसके बाद ही निकाय चुनावों की तारीखों का फैसला हो पाएगा।

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दरअसल, मध्य प्रदेश के 81 नगरीय निकायों से मुरैना और उज्जैन नगर निगम सहित 79 निकायों के महापौर-अध्यक्षों के आरक्षण को लेकर मामला लंबित है।इसी कड़ी में आज सोमवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ की युगल पीठ ने नगर निगम, नगर पालिका व नगर पंचायतों के आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई हुई।शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता एमपीएस रघुवंशी और शासकीय अधिवक्ता डीडी बंसल ने अपना पक्ष में कहा गया कि  इस मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में SLP दायर कर रहे हैं, केस प्रभारी नियुक्त कर दिया है। इसके चलते 2 सप्ताह का और समय दिया जाए, ताकी स्थिति स्पष्ट करने में आसानी हो।

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इसके बाद ग्वालियर हाईकोर्ट ने सरकार की मांग को स्वीकार करते हुए 3 हफ्ते की मोहलत दी है। अब अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी। बता दे कि मध्य प्रदेश के 407 नगरीय निकायों  में से 344 में चुनाव होने हैं और इनमें 16 नगर निगम भी शामिल है।अब जब तक हाईकोर्ट अपना फैसला नहीं सुना देती, तब तक निकाय चुनाव अधर में ही अटके रहेंगे।

ये है पूरा मामला

बीते महिने ग्वालियर हाईकोर्ट ने बहोड़ापुर निवासी अधिवक्ता मनवर्धन सिंह तोमर की जनहित याचिका के बाद नगर निगम, नगर पालिका व नगर पंचायतों के लिए 10 व 11 दिसंबर 2020 को जारी आरक्षण अधिसूचना पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि शासन ने आरक्षण में रोटेशन प्रक्रिया का पालन नहीं किया है। इसके बाद कोर्ट द्वारा शासन को जवाब पेश करने का आदेश दिया था, जिसकी सुनवाई आज 5 अप्रैल को होनी थी, लेकिन राज्य सरकार द्वारा मोहलत मांगने पर अब यह सुनवाई 26 अप्रैल को होगी।

याचिकाकर्ता का कहना है कि शासन ने दो नगर निगम व 79 नगर पालिका व नगर पंचायतों को अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए आरक्षित किया है मुरैना व उज्जैन नगर निगम के महापौर का पद वर्ष 2014 में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित था, लेकिन 2020 में भी इन सीटों को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रखा है। नगर पालिका एवं नगर पंचायतों में भी ऐसा ही किया गया है, जिसके चलते इन पदों पर अन्य वर्ग के लोग निकाय चुनाव नहीं लड़ पा रहे हैं, इसमें बदलाव किया जाना चाहिए था।