MP : शिवराज सरकार ने बनाया मास्टर प्लान, कैबिनेट में आ सकता है प्रस्ताव

सुपोषित मध्यप्रदेश बनाने के लिए कुपोषण मुक्त पंचायत और जिले (Malnutrition Free Panchayats and Districts) बनाना जरूरी है।

शिवराज सिंह चौहान

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश कुपोषण (Maulnutrition in MP) के चलते अक्सर सुर्खियों में रहता है।सरकार चाहे कोई भी हो लेकिन इस कलंक को आजतक नहीं मिटा पाई है। हाल ही में महिला एवं बाल विकास विभाग (Woman and Child Development Department) के जारी आंकड़ों के अनुसार, 4 लाख से अधिक बच्चे कुपोषण और 70 हजार से ज्यादा बच्चे गंभीर कुपोषित और 3.50 लाख बच्चों में मध्यम से तीव्र कुपोषण मिला है, ऐसे में एक बार फिर प्रदेश की शिवराज सरकार (Shivraj Government) ने नगरीय निकाय चुनावों (Urban Body Election) से पहले फिर कुपोषित मुक्त पंचायत और जिले का मुद्दा छेड़ दिया है।

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दरअसल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री महेन्द्र सिंह सिसोदिया (Panchayat and Rural Development Minister Mahendra Singh Sisodia) की अध्यक्षता में राज्य पोषण प्रबंधन रणनीति 2020 (State Nutrition Management Strategy 2020) में अपनाए गए अंतर्विभागीय समन्वय समिति की संयुक्त बैठक में फैसला लिया गया कि सुपोषित मध्यप्रदेश बनाने के लिए कुपोषण मुक्त पंचायत और जिले (Malnutrition Free Panchayats and Districts) बनाना जरूरी है।

मंत्री महेन्द्र सिंह सिसोदिया ने कहा कि कुपोषण-मुक्त पंचायतों और जिलों को पुरस्कृत करना, पोषण समृद्ध ग्राम के माध्यम से कुपोषण-मुक्त अन्नपूर्णा पंचायत की स्थापना करनी होगी। उन्होंने ‘पोषण समृद्ध ग्राम से अन्नपूर्णा पंचायत’ तक कैलेण्डर का विमोचन भी किया, जिसका उद्देश्य बच्चे कुपोषण से ग्रस्त न हो। सभी परिवारों में 5 से ज्यादा खाद्य समूह भोजन में शामिल हो।

खास बात तो ये है कि इसक लिए प्रदेश में पहली बार पोषण नीति बनाई जा रही है और प्रदेश केरल के बाद नीति बनाने वाला देश में दूसरा राज्य होगा। नीति का मसौदा तैयार कर वित्त विभाग (finance department) को भेजा गया है।उम्मीद की जा रही है कि अगली कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) में यह प्रस्ताव लाया जा सकता है। इसमें  जनपद सदस्य, सरपंच, पंच सहित स्थानीय स्तर के कर्मचारी सदस्य रहेंगे, जो पंचायत से लेकर जिले स्तर तक कुपोषण के कारण तलाशेंगे।

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सरकार वर्ष 2030 तक कुपोषण मुक्त मध्यप्रदेश का लक्ष्य लेकर चल रही है। इतना ही नहीं नीति में ग्राम स्तर के जिम्मेदार लोगों को कुपोषण से निपटने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।इस काम में स्वास्थ्य, शिक्षा (Health and Education Department), लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सहयोग से किया जाएगा। वही इसके लिए हर घर में किचन गार्डन और फसल के रूप में अलग-अलग अनाज उगाने पर जोर दिया जाएगा। ताकि उन्हें सभी जरूरी पोषक तत्व मिल सकें।

गौरतलब है कि महिला एवं बाल विकास विभाग (Woman and Child Development Department) ने राज्य के लगभग 10 लाख बच्चों का सर्वे किया था,जिसमें इंदौर में 12540, सागर 11184, रीवा 9260, उज्जैन 7555, ग्वालियर 6829, भोपाल में 4126, चंबल 4163 बच्चे कुपोषण के शिकार मिले। आंकड़ों पर एक नजर डाली जाए तो 10 लाख में से 4 लाख से अधिक बच्चे कुपोषण, 70 हजार से ज्यादा बच्चे गंभीर कुपोषित और 3.50 लाख बच्चों में मध्यम से तीव्र कुपोषण के शिकार मिले है।

 

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