जब पहली बार शिवराज ने साधना को लिखा था लव-लेटर, ऐसे किया था अपने प्यार का इजहार

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When-the-first-time-Shivraj-wrote-to-Sadhna

भोपाल।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आज पांच मई को अपनी पत्नी साधना सिंह के साथ 27वीं शादी की सालगिरह मना रहे है। सुबह से ही बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। भोपाल लोकसभा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ने भी उन्हें घर पहुंचकर वैवाहिक वर्षगांठ  पर शुभकामनाएं दी और सुखमय दाम्पत्य जीवन की कामना की। वैसे तो शिवराज हर साल कही ना कही घूमने जाते है और इस दिन कोअलग अंदाज में मनाते है लेकिन इस बार चुनावी व्यस्तता के चलते वे भोपाल में ही है और परिवार के साथ इस दिन को सेलिब्रेट कर रहे है।

इसी खास मौके पर आज हम आपको उनके लव स्टोरी से जुड़े कुछ ऐसे पहलुओं से रुबरु करवाने जा रहे है, जिनके बारे में आजतक ना आपने सुना होगा और ना कही पढा।5 मार्च 1959 को सिहोर जिले के जैतगांव में जन्मे शिवराज सिंह की शादी आज से 27  साल पहले गोंदिया की रहने वाली साधना मतानी से हुई थी। राजनीति में शिवराज अपने अलग अलग अंदाज के लिए जाने जाते है, तो वही उनकी शादी से जुड़े किस्से भी कम नही है।बात 1972 की है जब वे राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से जुड़ गए थे। इस दौरान शिवराज ने यह संकल्प ले लिया था कि वे कुंवारे ही रहेंगे। उनकी जिद के आगे घरवालों ने भी हार मान ली थी और शिवराज से छोटे भाई-बहनों की शादी हो गई थी।शिवराज शादी का ख्याल छोड़ राजनीति में ही अपने करियर को परवान देने में लगे थे। पिता प्रेम सिंह के सामने उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वो कुंवारे ही रहेंगे। 

लेकिन जब वे पहली बार बुधनी विधानसभा क्षेत्र से 1990 में विधायक बने। इसके साथ ही 1991 में विदिशा संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़े और जीत गए। सांसद बनने के बाद उनकी बहन ने शादी के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया। बहन की जिद पर ही शिवराज सिंह पहली बार गोंदिया की रहने वाली साधना सिंह से मिलने गए। साधना मतानी परिवार की बेटी थी। मुलाकात के दौरान शिवराज बड़ी मुश्किल से जाकर साधना के सामने बैठे थे।बताया जाता है कि साधना जब पहली बार उनके सामने आईं तो शिवराज उनके देख मोहित हो गए थे और बिना देर किए शादी के लिए हामी भर दी।इसके बाद दोनों के बीच बातों के लिए चिट्ठी का सिलसिला शुरु हो गया।

 

कहा जाता है कि सबसे पहले शिवराज सिंह ने ही अपने प्रेम का इजहार करते हुए साधना को चिट्ठी लिखकर इस क्रम को शुरु किया था और पहली चिट्ठी में ही उन्होंने अपने बारे में सारी बातें साधना को बता दी थी साथ ही उन्होंने उस पत्र में जिक्र किया राजनीतिक जीवन में होने की वजह से वह शायद सामान्य पति-पत्नी की तरह जीवन न जी सकें। कभी-कभी व्यस्तताओं की वजह से लंबे वक्त तक मिलना भी न हो सके।इसके बाद यह क्रम महिनों तक चलता रहा, इस बीच दोनों की मुलाकाते भी हुई, लेकिन छुप छुप कर।जिसमें शिवराज सिंह ने साधना सिंह को गुलाब का फूल देकर अपने प्यार का इजहार भी किया था। फिर दोनों 6 मई 1992 को शादी के बंधन में बंध गए।अब दोनों की जिंदगी में खुशियों की भरमार हैं। दोनों के दो बच्चे भी हैं।पिता की तरह एक बेटा राजनीति की राह पर चल रहा है तो दूसरा बेटा अपने काम और पढ़ाई में व्यस्त है। साधना भी पति से कदम ताल करके चलती हैं। भले ही शिवराज प्रदेश के मुख्यमंत्री ना हो लेकिन साधना का उनके प्रति प्यार और सम्मान आज भी वही है। 

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