एमपी के 14 हजार किसान कर्जमाफी से हुए बाहर, अब सरकार से लगाई मदद की गुहार

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होशंगाबाद। 

कांग्रेस ने अपने वादे के मुताबिक भले ही कर्जमाफी की प्रक्रिया शुरु कर दी हो लेकिन प्रदेश में अब भी ऐसे कई किसान है जिन्हें इस योजना का लाभ नही मिल पा रहा है। ताजा मामला होशंगाबाद से सामने आया है जहां बैंकों ने जिले के14  किसानों का कर्जा माफ करने से इंकार कर दिया गया है। खबर है कि इन किसानों के खाते उन प्राइवेट बैंकों में है जिन्हें सरकार ने लिस्ट में शामिल ही नही किया है।किसानों का कहना है कि प्रदेश में  ढाई लाख ऐसे किसान है जिनके खाते प्राइवेट बैंकों में है लेकिन सरकार ने इन बैंकों को लिस्ट में शामिल ही नही किया है।

दरअसल,  जिले के 14  हजार से ज्यादा किसानों ने 12 निजी बैंकों में 510 करोड़ रुपए का कर्ज किसानों ने लिया है। यह राशि बैंकों की कुल आउट स्टेंडिंग है, जिसमें कर्ज माफी की राशि भी शामिल है। 12 बैंकों में एक्सिस बैंक, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई बैंक, डीसीबी बैंक, इंडसंड बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, यश बैंक, फैडरल बैंक, बंधन बैंक, आईडीएफसी बैंक, रत्नाकर बैंक, एयू स्मार्ट बैंक शामिल हैं, लेकिन ये बैंके कर्जमाफी की लिस्ट मे शामिल नही है, जिसके चलते किसानों को इस योजना का लाभ नही मिल पाएगा।अब किसान परेशान हो रहे है और बैंकों और कलेक्टरों के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे है।

इसी के चलते मंगलवार को बाबई के किसान अपनी समस्या लेकर कलेक्टर की जनसुनवाई में भी पहुंचे और पूरे मामले से अवगत करवाया।किसानों का कहना है कि  बाबई ब्लॉक में करीब ढाई हजार किसान ऐसे हैं, जिनके खाते प्राइवेट बैंकों में हैं। बैंकों ने किसानों के ज्ञापन लेने से मना कर दिया है। जिसके बाद कलेक्टर ने उन्हें आश्वासन दिया है कि जानकारी को शासन स्तर पर पहुंचाया जाएगा। किसानों ने बताया पूरे प्रदेश में ढाई  लाख से अधिक किसान ऐसे हैं, जिन्होंने ऐसे निजी बैंकों से ऋण लिया है जो सरकार की सूची से बाहर हैं। 

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