Nobel Prize 2023: पियरे अगोस्तिनी, फेरेंस क्रॉज और एनी एल ह्यूलियर को फिजिक्स में मिला नोबेल पुरस्कार

Shashank Baranwal
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Physics Nobel Prize 2023: साल 2023 के लिए नोबेल पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। इस साल भौतिकी के क्षेत्र में तीन वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार दिया जाएगा। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने मंगलवार को इन वैज्ञानिकों के नामों की घोषणा की। इसमें अमेरिका के पियरे अगोस्तिनी, जर्मनी के फेरेंस क्रॉज और स्वीडन की एनी एल ह्यूलियर शामिल हैं। इन्हें एटम और मॉलीक्यूल के अंदर मौजूद इलेक्ट्रॉन्स की दुनिया देखने के टूल विकसित करने के लिए चुना गया है। इन वैज्ञानिकों ने प्रकाश के छोटे-छोटे पल्सेस क्रिएट करके इलेक्ट्रॉन्स की स्टडी की है।

इस उपलब्धि के लिए मिला नोबेल पुरस्कार

इन वैज्ञानिकों ने ऐसे टूल्स विकसित किए जिससे एट्टोसेकेंड (Attosecond) के समय में इलेक्ट्रॉन्स की दुनिया देखी जा सके। एट्टोसेकेंड 1/1,000,000,000,000,000,000 वां हिस्सा होता है। बता दें कि इतने ही सेकेंड में ब्रह्मांड की उम्र का पता चलता है।

पियरे एगोस्टिनी अमेरिका की ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी, फेरेंक क्रॉज जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट ऑफ क्वांटम ऑप्टिक्स और म्यूनिख के लुडविग मैक्सिमिलियन विश्वविद्यालय से और एनी एल ह्यूलियर स्वीडन के लुंड विश्वविद्यालय से संबंध रखते हैं।

नोबेल विजेता को मिलता है 1 मिलियन डॉलर

नोबेल पुरस्कार विजेता को 11 मिलियन स्वीडिश क्रोनर (1 मिलियन डॉलर) मिलता है। गौरतलब है कि यह धनराशि पुरस्कार के निर्माता अलफ्रेड नोबेल की वसीयत से दी जाती है। बता दें स्वीडिश आविष्कारक अलफ्रेड नोबेल की मृत्यु साल 1896 में हो गई थी।

बता दें चिकित्सा के क्षेत्र में सोमवार को कैटालिन कारिको और ड्रयू वीसमैन को नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया है। वहीं बुधवार को रसायन विज्ञान, गुरुवार को साहित्य, शुक्रवार को शांति और 9 अक्टूबर को अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार की घोषणा की जाएगी।


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पत्रकारिता उन चुनिंदा पेशों में से है जो समाज को सार्थक रूप देने में सक्षम है। पत्रकार जितना ज्यादा अपने काम के प्रति ईमानदार होगा पत्रकारिता उतनी ही ज्यादा प्रखर और प्रभावकारी होगी। पत्रकारिता एक ऐसा क्षेत्र है जिसके जरिये हम मज़लूमों, शोषितों या वो लोग जो हाशिये पर है उनकी आवाज आसानी से उठा सकते हैं। पत्रकार समाज मे उतनी ही अहम भूमिका निभाता है जितना एक साहित्यकार, समाज विचारक। ये तीनों ही पुराने पूर्वाग्रह को तोड़ते हैं और अवचेतन समाज में चेतना जागृत करने का काम करते हैं। मशहूर शायर अकबर इलाहाबादी ने अपने इस शेर में बहुत सही तरीके से पत्रकारिता की भूमिका की बात कही है– खींचो न कमानों को न तलवार निकालो जब तोप मुक़ाबिल हो तो अख़बार निकालो मैं भी एक कलम का सिपाही हूँ और पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूँ। मुझे साहित्य में भी रुचि है । मैं एक समतामूलक समाज बनाने के लिये तत्पर हूँ।

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