Parenting Tips: बच्चे इतने जिद्दी क्यों होते हैं? कहीं ये गलतियां तो नहीं कर रहे आप, जानें

Parenting Tips: बच्चे जिद्दी होते हैं, यह एक आम बात है। लेकिन कई बार यह जिद इतनी बढ़ जाती है कि माता-पिता के लिए उनसे निपटना मुश्किल हो जाता है। क्या आपने कभी सोचा है कि कहीं आपके गलत व्यवहार का ही तो असर आपके बच्चे पर नहीं पड़ रहा है? जी हां, कई बार माता-पिता की गलतियों के कारण ही बच्चे जिद्दी हो जाते हैं। आइए जानते हैं ऐसी कुछ गलतियों के बारे में जो बच्चों में जिद पैदा कर सकती हैं।

भावना चौबे
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Parenting Tips: हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे संस्कारी, शिक्षित और अच्छे इंसान बनें। इसके लिए वे अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाने से लेकर हर सुख-सुविधा मुहैया कराने तक हर संभव प्रयास करते हैं। बावजूद इसके, कई बार बच्चे जिद्दी हो जाते हैं, जिससे माता-पिता को मुश्किल होती है। इस समस्या का कारण माता-पिता की कुछ अनजानी गलतियां हो सकती हैं। ऐसी आदतों को पहचानकर और सुधारकर, न केवल बच्चों की जिद कम की जा सकती है, बल्कि उनके साथ एक मजबूत और सकारात्मक रिश्ता भी बनाया जा सकता है। आइए आज जानते हैं ऐसी ही कुछ आदतों के बारे में, जिनसे अनजाने में माता-पिता अपने बच्चों को जिद्दी बना देते हैं। इन आदतों को सुधारकर आप न सिर्फ बच्चों की जिद को कम कर सकते हैं, बल्कि उनके साथ एक मजबूत और सकारात्मक रिश्ता भी बना सकते हैं।

माता पिता की इन गलतियों के कारण बच्चे होते हैं ज़िद्दी

कंट्रोल करना

छोटे बच्चे अपने आसपास की दुनिया को समझने और उस पर अपना कुछ नियंत्रण रखने की कोशिश कर रहे होते हैं। जब उन्हें बार-बार रोका जाता है तो वे इसे अपनी आज़ादी में दखलअंदाजी की तरह महसूस करते हैं और अपनी इच्छा दिखाने के लिए जिद पर अड़ जाते हैं।

नज़रअंदाज़ करना

कभी-कभी बच्चे जिद करके आपका ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश करते हैं। अगर उन्हें लगे कि आप उन्हें नज़रअंदाज़ कर रहे हैं, तो वे जानबूझकर कुछ शरारत या गलत हरकत कर के आपका ध्यान अपनी तरफ खींचने की कोशिश कर सकते हैं।

भावनाओं को न समझना

छोटे बच्चे हमेशा अपनी भावनाओं को शब्दों में आसानी से नहीं बता पाते हैं। गुस्सा, थकान या निराशा जैसी भावनाओं को ज़ाहिर करने के लिए वे जिद का रास्ता चुन लेते हैं।

 फिर बच्चों से कैसे बात करें?

  • सबसे ज़रूरी बात ये है कि यह याद रखें कि बच्चे अभी सीख रहे हैं और गलतियाँ करना स्वाभाविक है। उनके साथ शांत रहें और धैर्य बनाए रखें, भले ही वे कितनी भी ज़िद करें।
  • बच्चे की बात ध्यान से सुनें और उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें। उन्हें बताएं कि आप उनकी भावनाओं को समझते हैं, भले ही आप उनकी हर बात से सहमत न हों।
  • हर बार सिर्फ “हां” या “नहीं” में जवाब देने के बजाय उन्हें कुछ चुनने का मौका दें। उदाहरण के लिए, “क्या तुम टोपी पहनना चाहोगे या स्कार्फ?” इससे उन्हें थोड़ा सा नियंत्रण महसूस होगा और जिद करने की संभावना कम हो जाएगी।
  • जब बच्चा अच्छा व्यवहार करता है, तो उसकी तारीफ करें और उसे कोई छोटा सा इनाम दें। इससे वे अच्छा व्यवहार करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
  • बच्चों को स्पष्ट रूप से बताएं कि उनसे क्या उम्मीद की जाती है और गलत करने पर क्या होगा। याद रखें, ये नियम उनकी उम्र के हिसाब से होने चाहिए और उनका पालन हमेशा सख्ती से किया जाना चाहिए।

(Disclaimer- यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं के आधार पर बताई गई है। MP Breaking News इसकी पुष्टि नहीं करता।)


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भावना चौबे

भावना चौबे

इस रंगीन दुनिया में खबरों का अपना अलग ही रंग होता है। यह रंग इतना चमकदार होता है कि सभी की आंखें खोल देता है। यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि कलम में बहुत ताकत होती है। इसी ताकत को बरकरार रखने के लिए मैं हर रोज पत्रकारिता के नए-नए पहलुओं को समझती और सीखती हूं। मैंने श्री वैष्णव इंस्टिट्यूट ऑफ़ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन इंदौर से बीए स्नातक किया है। अपनी रुचि को आगे बढ़ाते हुए, मैं अब DAVV यूनिवर्सिटी में इसी विषय में स्नातकोत्तर कर रही हूं। पत्रकारिता का यह सफर अभी शुरू हुआ है, लेकिन मैं इसमें आगे बढ़ने के लिए उत्सुक हूं। मुझे कंटेंट राइटिंग, कॉपी राइटिंग और वॉइस ओवर का अच्छा ज्ञान है। मुझे मनोरंजन, जीवनशैली और धर्म जैसे विषयों पर लिखना अच्छा लगता है। मेरा मानना है कि पत्रकारिता समाज का दर्पण है। यह समाज को सच दिखाने और लोगों को जागरूक करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। मैं अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करूंगी।

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