Planting Tips: मानसून की शुरुआत में करें गुड़हल के पौधे में ये काम, नहीं होगी फूलों की कमी

Planting Tips: मानसून की बारिश न सिर्फ धरती को हरी-भरी कर देती है, बल्कि ये गुड़हल के पौधों के लिए भी एक नया जीवन लेकर आती है। अगर आप चाहते हैं कि इस साल आपके गुड़हल के पौधे खूबसूरत फूलों से लदे रहें, तो मानसून की शुरुआत में ही उनकी थोड़ी सी देखभाल कर लें।

भावना चौबे
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Planting Tips: प्रकृति का अद्भुत उपहार, जो अपनी खूबसूरती और रंगों से हर किसी का मन मोह लेते हैं। हर कोई चाहता है कि उसके घर के बगीचे में गुड़हल के फूल सालों भर खिले रहें। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि मानसून आने से पहले ही कुछ गुड़हल के पौधों में फूल आना बंद हो जाते हैं? चिंता न करें, आज हम आपको कुछ आसान टिप्स बताएंगे, जिनकी मदद से आप मानसून के लिए अपने गुड़हल के पौधे को तैयार कर सकते हैं और भरपूर फूलों का आनंद ले सकते हैं। इन टिप्स का पालन करके आप अपने गुड़हल के पौधे को नया जीवन दे सकते हैं और मानसून के बाद भी उसके खूबसूरत फूलों का आनंद ले सकते हैं।

कटाई करें

मानसून आने से पहले गुड़हल के पौधे की हल्की कटाई करना उसे नया जीवन देने जैसा है। यह एक आसान सी प्रक्रिया है जो आपके पौधे के स्वास्थ्य और फूल आने में अहम भूमिका निभाती है। कटाई करने से मृत, क्षतिग्रस्त और कमजोर शाखाओं को हटा दिया जाता है। इससे पौधा अनावश्यक भार से मुक्त होकर स्वस्थ रहता है और पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग करता है। कटाई के बाद पौधे में हवा का प्रवाह बेहतर हो जाता है। इससे न सिर्फ पौधे को सांस लेने में आसानी होती है बल्कि रोगों का खतरा भी कम हो जाता है। कटाई करने से पौधा नई शाखाओं और पत्तियों को उगाने के लिए प्रेरित होता है। नतीजतन, अधिक मात्रा में खूबसूरत और चमकीले फूल खिलते हैं।

कैसी होनी चाहिए मिट्टी

गुड़हल को अच्छी जल निकास वाली मिट्टी पसंद है। इसका मतलब है कि पानी जमीन में जमने नहीं बल्कि जल्दी से निकल जाए। अगर आपके बगीचे की मिट्टी भारी है, तो रेत या परलाइट मिलाकर उसे हल्का बनाएं। इससे जड़ों को सांस लेने में आसानी होगी और वे सड़ने से बचेंगी। गुड़हल थोड़ी अम्लीय मिट्टी (pH 6.0-6.5) में ज्यादा खुश रहते हैं। अगर आपकी मिट्टी ज्यादा क्षारीय है, तो घबराने की बात नहीं है। आप उसमें थोड़ा सल्फर या खट्टी खाद मिलाकर उसकी अम्लता को बढ़ा सकते हैं।

इस तरह डालें खाद

मानसून के दौरान बारिश के कारण मिट्टी से पोषक तत्व बह जाते हैं। खाद डालने से मिट्टी में पोषक तत्वों की भरपाई होती है, जिससे पौधे को स्वस्थ रहने और भरपूर फूल देने में मदद मिलती है। खाद मिट्टी को हवादार बनाती है और जड़ों को मजबूत बनाती है, जिससे पौधा पानी और पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से ग्रहण कर पाता है। खाद में मौजूद सूक्ष्मजीव पौधे को रोगों से बचाने में मदद करते हैं। खाद डालने से गुड़हल के फूल बड़े, चमकीले और अधिक मात्रा में खिलते हैं।

कीटों और रोगों को कैसे बनाएं

अपने गुड़हल के पौधे का नियमित रूप से निरीक्षण करें। पत्तियों, तनों और फूलों पर किसी भी तरह के कीटों या बीमारी के लक्षणों का ध्यान दें। मृत पत्तियों, टहनियों और गिरे हुए फूलों को हटाकर अपने बगीचे को साफ रखें। इससे कीटों को पनपने का मौका नहीं मिलेगा। स्वस्थ और पोषित पौधे कीटों और बीमारियों से लड़ने में अधिक सक्षम होते हैं। नीम के तेल या लहसुन के अर्क का पतला घोल बनाकर पौधे पर स्प्रे करें। इन छोटे, हरे रंग के चूसने वाले कीटों से बचने के लिए तेज पानी का फव्वारा या हल्के साबुन के पानी का घोल स्प्रे करें।

(Disclaimer- यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं के आधार पर बताई गई है। MP Breaking News इसकी पुष्टि नहीं करता।)

 


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भावना चौबे

भावना चौबे

इस रंगीन दुनिया में खबरों का अपना अलग ही रंग होता है। यह रंग इतना चमकदार होता है कि सभी की आंखें खोल देता है। यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि कलम में बहुत ताकत होती है। इसी ताकत को बरकरार रखने के लिए मैं हर रोज पत्रकारिता के नए-नए पहलुओं को समझती और सीखती हूं। मैंने श्री वैष्णव इंस्टिट्यूट ऑफ़ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन इंदौर से बीए स्नातक किया है। अपनी रुचि को आगे बढ़ाते हुए, मैं अब DAVV यूनिवर्सिटी में इसी विषय में स्नातकोत्तर कर रही हूं। पत्रकारिता का यह सफर अभी शुरू हुआ है, लेकिन मैं इसमें आगे बढ़ने के लिए उत्सुक हूं। मुझे कंटेंट राइटिंग, कॉपी राइटिंग और वॉइस ओवर का अच्छा ज्ञान है। मुझे मनोरंजन, जीवनशैली और धर्म जैसे विषयों पर लिखना अच्छा लगता है। मेरा मानना है कि पत्रकारिता समाज का दर्पण है। यह समाज को सच दिखाने और लोगों को जागरूक करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। मैं अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करूंगी।

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