गुना/ विजय जोगी। गुना जिले में विभिन्न विधानसभा के एक से अधिक गांवों में निवास करने वाले गोंड आदिवासी समाज के 25 हजार से अधिक लोगों के सामने अब अपनी पहचान का संकट अब खड़ा हो गया है। गोंड आदिवासी समाज के लोगों को जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भटकना पड़ रहा है जबकि मध्य प्रदेश सरकार और गुना कलेकटर ने स्थानीय अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि इन आदिवासियों के प्रमाण पत्र जल्द से जल्द ग्राम में ही शिविर लगाकर जाति प्रमाण पत्र बनाए जाएं। इसके बाद भी प्रमाण पत्र अभी तक नहीं बनाए जा रहे हैं। ऐसे में एक बार फिर गोंड आदिवासी समाज के लोगों ने गुना कलेकटर को एक पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है और चेतावनी दी है कि अगर उनके प्रमाण पत्र बनाने का काम जल्द शुरू नहीं हुआ तो उसका असर बमोरी विधानसभा के होने वाले उपचुनाव में देखने को मिल सकता है। ऐसे में इस जाति की पहचान को लेकर कांग्रेस उपचुनाव में मुद्दा बना सकती है। इसकी वजह यह है कि गोंड जाति के लोग बहुत ज्यादा संख्या में है और बमोरी विधानसभा में निवास करते हैं। यहां होने वाली उपचुनाव में कांग्रेस इसे बड़ा मुद्दा बनाकर अपना वोट बैंक भी तैयार कर सकती है।

गोंड आदिवासी समाज के काफी संख्या में लोग एकत्रित होकर गुना कलेकटर पहुंचे और उन्होंने कलेक्टर को एक पत्र दिया। जिसमें कहा गया कि गुना जिले में निवास करने वाले गोंड आदिवासी समाज के लोगों को प्रमाण पत्र जारी करने के लिए मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने निर्देश जिले के अधिकारियों को दिए थे। इस संबंध में तत्कालीन कलेक्टर ने भी आदेश दिए थे, परंतु उस आदेश का अभी तक क्रियान्वयन नहीं हुआ है। किसी भी गांव में जाति के लोगों को प्रमाण पत्र देने के लिए शिविर तक नहीं लगाए गए हैं। गुना जिला कलेक्टर एस विश्वनाथन से मिलने वालों में मुख्य रूप से धर्म स्वरूप भारगब ने पूरे मामले में बताया कि अधिकारियों ने अभी तक इन लोगों के प्रमाण पत्र जारी नहीं किए हैं जिसके चलते इन लोगों को अपने बच्चों के एडमिशन में भारी परेशानियां आ रही है और शासकीय योजनाओं का लाभ भी इन सभी लोगों को नहीं मिल पा रहा है। बता दें कि 25 हजार से अधिक गोंड आदिवासी समाज के लोग बमोरी विधानसभा में निवासरत है और इन लोगों को आज तक इनके जाति प्रमाण पत्र नहीं मिल पाए हैं। जिसके चलते आने वाली पीढ़ी को भी जाति प्रमाण पत्र ना होने से पढ़ाई और नौकरियों में उचित स्थान नहीं मिल पाएगा। वही आने वाले विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने का प्रयास भी कर रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या इतनी बड़ी संख्या में गोंड आदिवासी समाज के लोगों को प्रशासन और सरकार मदद दे पाती है, या फिर इन आदिवासी लोगों के हाल इसी तरह रहेंगे। यह आने वाला समय बताएगा फिलहाल प्रशासनिक अधिकारियों से जब मीडिया ने बात की तो उन्होंने जल्द से जल्द प्रमाण पत्र बनाने का भरोसा तो दिया लेकिन उचित निर्देश देने में प्रशासन आज भी आनाकानी करता नजर आया।