दिवाली के दिए से भड़की आग ने लिया भीषण रूप, जिंदा जली युवती, तीन झुलसे

Amit Sengar
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Balaghat News : बालाघाट खैरलांजी थाना क्षेत्र के भौरगढ़ में खुशियों का त्यौहार साठवने परिवार के लिए दुख और नुकसान लेकर आया। दिवाली के दिए से साठवने परिवार की दुकान में लगी आग से ना केवल उनकी 20 वर्षीय भांजी की जिंदा जलने से दुःखद मौत हो गई। बल्कि परिवार के तीन भी इस आग से झुलस गए है, वहीं पुरानी दुकान और मकान आग से तबाह हो गया। घटना में मृतक युवती का शव बरामद कर खैरलांजी पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई के उपरांत शव का पीएम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया है। वहीं मामले में मर्ग कायम कर जांच में लिया है।

यह है पूरा मामला

घटना 12 नवंबर रविवार के देरशाम की बताई जा रही है। मिली जानकारी अनुसार भौरगढ़ निवासी शिक्षक विजय साठवने के मेनरोड किनारे नीचे स्टेशनरी और मनिहारी की दुकान और ऊपर मकान है। 12 नवंबर रविवार को दीपावली पर भांजी 20 वर्षीय प्रांजल पिता तुलाराम वाघमारे, मामा के घर दीपावली मनाने पहुंची थी। यहां उसने परिवार के पूजा अर्चना से पूर्व दुकान में अलग-अलग स्थान पर दिए जलाए थे। इस परिवार के सदस्यों में किशोर साठवने, प्रतिक साठवने और विजय साठवने सहित परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मौजूद थे। इस दौरान दीपावली पर जल रहे एक दिए की लौ ने पास ही परदे पर आग पकड़ ली। पर्दे की आग ने दुकान और मकान को भयावह आग में घेर लिया। बताया जाता है कि दुकान में पेट्रोल से भरी बॉटले थी, जिसमें आग लगने के कारण, आग तेजी से बढ़ी और दुकान एवं मकान को घेर लिया। जिसमें परिवार के विजय साठवने, किशोर साठवने, प्रतीक साठवने तो किसी तरह आग से बाहर तो निकल आए लेकिन वह भी झुलसस गए, वहीं किचन में फंसी प्रांजल बाहर नहीं निकल सकी और वह आग की चपेट में आकर जिंदा जल गई। जिससे उसकी मौत हो गई। हालांकि घटना के बाद वारासिवनी से दमकल वाहन तो पहुंचे लेकिन तब तक आग ने दुकान और मकान को तबाह कर युवती को अपनी चपेट में ले लिया था।

घटना की जानकारी के बाद एएसआई उमेश दियेवार और हमराह स्टॉफ के पहुंचे और अग्रिम कार्रवाई की। उन्होंने बताया कि आग की चपेट में आने से युवती की मौत हो गई। जबकि तीन लोग झुलस गए है और शव को बरामद कर शव पंचनामा कार्यवाही के उपरांत आज 13 नवंबर को शव का पीएम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया।
बालाघाट से सुनील कोरे की रिपोर्ट


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मुझे अपने आप पर गर्व है कि में एक पत्रकार हूँ। क्योंकि पत्रकार होना अपने आप में कलाकार, चिंतक, लेखक या जन-हित में काम करने वाले वकील जैसा होता है। पत्रकार कोई कारोबारी, व्यापारी या राजनेता नहीं होता है वह व्यापक जनता की भलाई के सरोकारों से संचालित होता है। वहीं हेनरी ल्यूस ने कहा है कि “मैं जर्नलिस्ट बना ताकि दुनिया के दिल के अधिक करीब रहूं।”

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