MP: भिंड में इस गाँव के लोगों ने किया पंचायत चुनाव का बहिष्कार, कहा पहले स्कूल-रोड फिर वोट, जाने

महुरी गाँव के ग्रामीणों ने पंचायत चुनावों का बहिष्कार कर दिया है। ग्रामीणों ने गाँव के बाहर "चुनाव बहिष्कार" के पोस्टर और बैनर लगा कर वोट ना मांगने के लिए कहा है।

Source: Social Media

भिंड, डेस्क रिपोर्ट। फिलहाल मध्यप्रदेश में पंचायत चुनाव (Panchayat Chunav) की तैयारी जोरों-शोरों चल रही। प्रत्याशियों का नाम भी सामने आ चुका है और प्रदेश में राजनीतिक गर्मा-गर्मी भी जारी है। इसी बीच एमपी के भिंड (Bhind) जिले में बसे एक गाँव ने लोगों का ध्यान अपनी और खींचा। गाँव का नाम महुरी बताया जा रहा है। महुरी गाँव के ग्रामीणों ने पंचायत चुनावों का बहिष्कार कर दिया है। ग्रामीणों ने गाँव के बाहर “चुनाव बहिष्कार” के पोस्टर और बैनर लगा कर वोट ना मांगने के लिए कहा है। ग्रामीणों ने खुल कर कहा है की उन्हें पहले रोड और स्कूल चाहिए तभी वो वोट देंगे। बता दें की इस गाँव की आबादी 1250 हैं और 688 मतदाता है।

यह भी पढ़े… हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, राज्य सरकार को दिया ये आदेश, इन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

गोहद विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत शेरापुर के अंतर्गत आने वाले महुरी ग्रामीण वासियों ने यह आरोप लगाया है की गाँव का मुख्य मार्ग कच्चा है, जो बारिश में कीचड़ और गंदगी ने भर जाता है। आजादी के इतने सालों बाद भी गाँव में कोई मिडिल स्कूल नहीं है, छात्रों को चल कर शेरपुर गाँव जाना पड़ता है। साथ ही प्राथमिक स्कूल का हाल भी बुरा है, वहाँ बॉउन्ड्री वॉल भी नहीं है। ग्रामीणों का कहना है की हर साल नेता और चुनाव प्रतिनिधि आते है, आश्वासन देते है, लेकिन जीतने के बाद भूल जाते हैं। लेकिन अब ग्रामीण तभी वोट देंगे जब गाँव में पक्का मार्ग, स्कूल और मुक्तिधाम के लिए रास्ता बन जाएगा।

MP: भिंड में इस गाँव के लोगों ने किया पंचायत चुनाव का बहिष्कार, कहा पहले स्कूल-रोड फिर वोट, जाने

यह भी पढ़े… पेट्रोल-डीजल के रेट को लेकर बढ़ सकती है चिंता, क्रूड ऑयल हुआ महंगा, जाने MP के सभी शहरों के ईंधन के रेट

ग्रामीणों का यह भी कहना है की अब तक उन्होंने ने शिकायत भी दर्ज करवाई है, लेकिन इसपर कोई एक्शन नहीं लिया है। गाँव की सड़क खराब होने के कारण 2018 में बारिश के मौसम में 8 ग्रामीणों की मौत हो गई थी। अन्य गाँव से भी संपर्क पूरी तरह से टूट जाता है। और महुरी गाँव के लोग कैद हो जाते हैं। 2018 में बारिश का पानी जमा होने के कारण महामारी हो गई थी। इस दौरान 7 लोगों को अपनी जान ग्वानी पड़ी और 17 का इलाज ग्वालियर अस्पताल में हुआ। प्रशासन का कहना है की ग्रामीणों से बातचीत करने के लिए जनपद पंचायत सीईओ को भेजा जाएगा।