कारखानों में 12 घंटे की शिफ्ट, मिलेगा ओवरटाइम, CM ने किये कई बड़े ऐलान

भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार बड़े कदम उठा रही है| मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj SIngh chauhan) ने श्रम सुधारों (Labor reforms) को लेकर बड़े एलान किये है| अब कारखानों और कार्यालयों में काम कराने की पाली 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे की गई है। सप्ताह में 72 घंटे तक कार्य कराए जाने की अनुमति होगी। इसके लिए ओवर टाइम देना होगा। उत्पादकता बढ़ाने के लिए उद्यमी सुविधा अनुसार पाली में भी बदलाव कर सकते हैं।

सीएम ने कहा यह अवसर है जब हम अपने नियमों को समय के हिसाब से बदलें, उनका सरलीकरण करें, ताकि देश और दुनिया से अन्य स्थानों पर जा रहे उद्योगों को अपने प्रदेश में ला सके| इसलिए श्रम कानूनों में समय के अनुरूप व्यापक सरलीकरण किया है| इससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा और श्रमिकों के हितों की रक्षा हो सकेगी| मुख्यमंत्री ने एलान करते हुए कहा कि प्रदेश में अब दुकानें खुलने की समय सीमा सुबह छह बजे से रात बारह बजे तक होगी। यह अभी सुबह आठ से रात दस बजे तक थी। इस संशोधन से जहां रोजगार के अवसर बढ़ेंगे वहीं, दुकानों में भीड़ भी नहीं लगेगी।

लाइसेंस की प्रक्रिया 1 दिन में पूरी होगी
सीएम ने कहा हमने रोज़गार उपलब्ध कराने के लिए दो योजनाएं बनाई हैं एक स्टार्टअप योजना, जिसके तहत मनरेगा के अंतर्गत हमने कल लगभग 13 लाख मजदूरों को रोज़गार दिया। हमने निर्माण की बाकी गतिविधियां भी शुरू की हैं जिससे रोज़गार के अवसर सृजित हो रहे हैं| राज्य में नौकरी के अवसरों और विकास को बढ़ावा देने के लिए, कंपनियों, दुकानों, ठेकेदारों और बीड़ी निर्माताओं के लिए पंजीकरण या लाइसेंस की प्रक्रिया को केवल 1 दिन में पूरा किया जाएगा। ये पहले 30 दिन में होता था|

50 से कम श्रमिक लगाने वाले ठेकेदारों को पंजीयन की जरुरत नहीं
कारखानों की कार्य प्रक्रिया को सरल करने के लिए 61 रजिस्टर और तेरह रिटर्न दाखिल करने के प्रावधान को समाप्त कर दिया है। 50 से कम श्रमिक वाले संस्थानों को निरीक्षण से मुक्त कर दिया है। इससे कुटीर एवं छोटे उद्योगों को फायदा होगा। वहीं ट्रेड यूनियन और कारखाना प्रबंधन के बीच विवादों का निराकरण अब सुविधा अनुसार अपने स्तर पर ही किया जा सकेगा। इसके लिए लेबर कोर्ट जाने की जरूरत नहीं होगी। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग अपनी आवश्यकता से श्रमिक रख सकेंगे। 50 से कम श्रमिक लगाने वाले ठेकेदारों को पंजीयन कराने की जरूरत नहीं होगी। इसके बिना भी वे काम कर सकेंगे।