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भोपाल गैस त्रासदी : याद आया वो भयावह दिन, मृतकों को श्रद्धासुमन अर्पित, विकास की अंधी दौड़ में मानव और प्रकृति का ध्यान रखने की अपील

भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा हम पीड़ित परिवारों को मदद देने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं, बचे हुए जहरीले कचरे के निष्पादन के सवाल पर मंत्री ने कहा, मामला सुप्रीम कोर्ट में है उसके मार्गदर्शन पर पूरी प्रक्रिया चल रही है।
Bhopal Gas Tragedy

Bhopal Gas Tragedy:  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 2 और 3 दिसंबर 1984 की दरमियानी रात जो विश्व की सब्सी बड़ी औद्योगिक त्रासदी हुई जिसे दुनिया भोपाल गैस काण्ड के नाम से जनता है, उसके घाव बरसों बाद अभी भी भरे नहीं है, हर साल इस त्रासदी में जान गंवाने वालों को याद कर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की जाती है, आज इसी क्रम में एक श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल की उपस्थिति में आज बरकतउल्ला भवन सेंट्रल लाइब्रेरी में भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग द्वारा ‘श्रद्धांजलि एवं सर्वधर्म प्रार्थना सभा’ आयोजित की गई इसमें मध्य प्रदेश सरकार के खेल मंत्री विश्वास सारंग, विभागीय मंत्री कुंवर विजय शाह, राज्य मंत्री कृष्णा गौर, भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, दक्षिण-पश्चिम विधायक विधायक भगवान दास सबनानी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने त्रासदी के दिवंगतों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

यूनियन कार्बाइड से रिसी मिथाइल आइसोसाइनेट गैस ने हजारों को मौत की नींद सुला दिया 

उस काले और भयावह दिन को याद करते हुए कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि आज हम उन सभी मृत आत्माओं की शांति के लिए यहाँ निकट्ठे हुए जो असमय ही गैस त्रासदी के चलते 2 और 3 दिसंबर 1984 की दरमियानी मौत की नींद में सो गए। उस काली रात को यूनियन कार्बाइड कारखाने से निकली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस रिसने से हजारों जान चली गई और हजारों आज भी उसका दंश झेल रहे हैं, सरकारी आंकड़ों में 5000 लोगों की मौत हुई लेकिन ये आंकड़ा इससे कई गुना अधिक है।

औद्योगिक विकास हो लेकिन पर्यावरण, जीव जंतु, मानव जाति को नुकसान ना हो 

खेल मंत्री सारंग ने कहा भौतिक विकास की आपाधापी, औद्योगिक विकास की आपाधापी में कहीं हम मानव जाति के अस्तित्व पर ही प्रश्न चिन्ह तो नहीं लगा रहे ये आज सोचने का समय है, औद्योगिक विकास हो लेकिन पर्यावरण, जीव जंतु, मानव जाति के भविष्य निर्धारण के साथ हो ये संकल्प हमने आज लिया है, उन्होंने कहा भोपाल गैस त्रासदी से उपजा दर्द आज भी हम सबको याद है। ईश्वर ऐसी त्रासदी से देश और दुनिया के हर कोने को सर्वदा सुरक्षित रखे, मेरी यही प्रार्थना है।

पीड़ित परिवारों के साथ है सरकार 

भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा कि हमने उन मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की है जिन्होंने अपनी जान इस त्रासदी में गंवाई, हम ऐसे परिवारों को मदद देने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं, बचे हुए जहरीले कचरे के निष्पादन के सवाल पर मंत्री ने कहा, मामला सुप्रीम कोर्ट में है उसके मार्गदर्शन पर पूरी प्रक्रिया चल रही है।

इस त्रासदी ने हमें एक गंभीर सबक दिया है

मंत्री विजय शाह ने कहा, मानवीय त्रुटियों, घोर लापरवाही एवं सुरक्षा मानकों की अवहेलना के परिणामस्वरूप घटित इस त्रासदी ने हमें एक गंभीर सबक दिया है। यह दुःखद घटना औद्योगिक सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करने के साथ-साथ मानवीय जीवन के मूल्य का भी स्मरण कराती है। बाबा महाकाल से प्रार्थना है कि ऐसी विभीषिका की पुनरावृत्ति फिर कभी न हो और मानव समाज को कभी इस तरह की भयावह त्रासदी का सामना न करना पड़े।

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Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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