कमलनाथ का ‘दंगा जाप’ उनकी असलियत को उजागर करता है : विष्णुदत्त शर्मा

Amit Sengar
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Bhopal News : भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने कमलनाथ के बयान पर कहा कि सावन के अंधे को हर जगह हरा-ही-हरा दिखाई देता है। इसलिए कांग्रेस के नेता कमलनाथ को हर जगह दंगा ही दिखाई दे रहा है। शायद उन्हें 1984 की घटना याद आ रही है। 2018 के चुनाव से पहले कमलनाथ में मुसलमानों के वोटों को लेकर जो कहा था, वह किसी से छुपा नहीं है। आज फिर रमजान के बहाने छिंदवाड़ा में बैठकर जिस प्रकार से कमलनाथ ‘‘दंगा का जाप’’ कर रहे है यह उनकी असलियत को उजागर करता है। शर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश में यदि कमलनाथ की शह पर किसी ने दंगा भड़काने की कोशिश की तो उसको परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए।

कमलनाथ बताएं जिन राज्यों में दंगे हो रहे वहां किसकी सरकार ?

विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि कमलनाथ को शायद मुजफ्फरनगर, भागलपुर, पटना, बरेली, लखनऊ, कानपुर, मुंबई, कोलकाता जैसे अनेक स्थान याद आ रहे है, जहां कांग्रेस के शासन में लगातार दंगे होते रहे और उन दंगों में कांग्रेस की सरकारों की भूमिका की चर्चा आज तक होती है। उन्होंने कहा कि कौन भूल सकता है कि 1984 में जब हजारों सिखों को ट्रेनों से खींचकर, बसों से उतारकर उनके गले में टायर डालकर जिंदा जला दिया गया था। उस घटना के आरोपी कौन थे? यह किसी से छुपा नहीं है। उन्होंने कहा कि कमलनाथ और उनकी पार्टी कांग्रेस ने देश में दंगे के अलावा दिया ही क्या है ? इन्हें सामाजिक सदभाव पसंद नहीं आता है। इनके मंसूबे हमेशा यह रहते है कि समाज में किस प्रकार वैमनस्यता फैले। प्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने सवाल करते हुए कहा कि आज भी जिन राज्यों में दंगे हो रहे है वहां किसकी सरकार है ? कमलनाथ को यह बताना चाहिए।

लोकतंत्र में कुछ दल अपना अस्तित्व बचाने के लिए अलोकतांत्रिक लड़ाई लड रहे

शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र की लडाई चुनाव के हार से जीत से होती है। कमलनाथ और कांग्रेस लगातार यह लडाई हार रहे हैं। कांग्रेस के नेता अपने दल के घटते जनाधार और अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड रहे हैं और इसके लिए वे लोकतंत्र में अलोकतांत्रिक तरीके से लड़ाई लड़ने से भी पीछे नहीं हटते हैं। ऐसे राजनैतिक रूप से विकलांग और नाकारा नेता इसी प्रकार की समाज विरोधी गतिविधियों का सहारा लेते हैं जो कमलनाथ लेना चाहते हैं। कांग्रेस काल में मध्यप्रदेश में भय, आतंक, नक्सलवाद और डकैत समस्या चरम पर थी।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की जनता भूल नहीं सकती है कि कांग्रेस के समय मध्यप्रदेश में ग्वालियर, चंबल से लेकर रीवा तक डकैतों का साम्राज्य था। प्रदेश की जनता को पता है कि मध्यप्रदेश में जहां कुंओं से एके-47 जैसे हथियार निकले थे, तब किसकी सरकार थी ? प्रदेश में नक्सलवादी मंत्रियों का गला काटने की हिम्मत करते थे, तब किसकी सरकार थी ? कौन भूल सकता है कि जब प्रदेश में सिमी का आतंक सिर चढकर बोल रहा था तब किसकी सरकार थी ? उन्होंने कहा कि प्रदेश में जब कांग्रेस की सरकार थी तब भय, आतंक, नक्सलवाद और डकैत समस्या चरम पर थी। प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद सारी समस्याओं को जड़ से खत्म किया गया। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के नेतृत्व में आज प्रदेश शांति का टापू है। शर्मा ने कहा कि इस शांति के टापू में विघ्न फैलाने की इजाजत न कमलनाथ को दी जा सकती ना उनके सिपहसालारों को।


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मुझे अपने आप पर गर्व है कि में एक पत्रकार हूँ। क्योंकि पत्रकार होना अपने आप में कलाकार, चिंतक, लेखक या जन-हित में काम करने वाले वकील जैसा होता है। पत्रकार कोई कारोबारी, व्यापारी या राजनेता नहीं होता है वह व्यापक जनता की भलाई के सरोकारों से संचालित होता है। वहीं हेनरी ल्यूस ने कहा है कि “मैं जर्नलिस्ट बना ताकि दुनिया के दिल के अधिक करीब रहूं।”

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