BJP जिलाध्यक्षों का फैसला कल, उम्र के बंधन में कई होंगे बाहर, दावेदार भोपाल से दिल्ली तक सक्रिय

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी में संगठन चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। मंडल अध्यक्षों के निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 30 नवंबर को जिलाध्यक्षों का निर्वाचन होना है। पार्टी नेतृत्व ने मंडल अध्यक्षों की तरह जिलाध्यक्षों के लिए भी उम्र का क्राइटेरिया तय किया है। जिसके तहत 50 साल तक की आयु के नेताओं को भी जिलाध्यक्ष बनाया जाएगा। हालांकि ऐसे जिले जहां जिलाध्यक्ष के लिए योग्य दावेदार नहीं वहां 55 साल तक के नेता को मौका मिल सकता है। निर्वाचन की प्रक्रिया से पहले जिलाध्यक्ष की दौड़ में शामिल भाजपा के उम्रदराज नेताओं ने प्रदेश मुख्यालय पहुंचकर उम्र का बंधन खत्म करने की मांग रखी। जिसे पार्टी ने सिरे से खारिज कर दिया है। 

भाजपा प्रदेेश मुख्यालय में जिलाध्यक्षों के निर्वाचन को लेकर पिछले दो दिन से सरगर्मी बढ़ गई है। जिलों से भोपाल आए नेताओं ने चुनाव अधिकारियों से लेकर प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत से भी चर्चा की। नेताओं ने तर्क दिया कि जिलाध्यक्ष के लिए अनुभवी नेताओं को मौका मिलना चाहिए, उम्र की बंधन तय करने  से जिलाध्यक्ष के लिए अनुभवी नेता नहीं आ पाएंगे। पिछले दो दिन के भीतर दो दर्जन से ज्यादा जिलों के नेताओं ने प्रदेश कार्यालय में पहुंचकर अपनी बात रखी है। हालांकि प्रदेश नेतृत्व ने इन नेताओं को यह कहकर लौटा दिया है कि वे चुनाव अधिकारी के सामने अपने तथ्य रखें, क्योंकि भाजपा की ओर से सभी संगठनात्मक 56 जिलों के लिए चुनाव अधिकारी तय कर दिए हैं। संबंधित जिलों में उनका आज से पहुंचना भी शुरू हो गया है। 

कई दावेदार हो जाएंगे बाहर

प्रदेश भाजपा की ओर से जिलाध्यक्षों के लिए 50 साल की आयु सीमा तय कर रखी है। लेकिन कुछ जिले ऐसे भी हैं जहां भाजपा के पास नेताओं का टोटा है। ऐसे में इन जिलों में 50 पार के नेता को भी मौका मिल सकता है। उम्र की वजह से कई जिलों में दावेदार जिलाध्यक्ष की दौड़ से बाहर हो जाएंगे। इसके अलावा अन्य जिलों में जिलाध्यक्ष के लिए खींचतान भी मची है। अपने समर्थकों के लिए बड़े नेता भी गोटियां फिर करने में जुटे हैं। हालांकि मंडल अध्यक्षों के चुनाव में बड़े नेताओं ने खुले तौर पर सक्रियता नहीं दिखाई थी, लेकिन जिलाध्यक्षों के चुनाव में बड़े नेता भी सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। 

जातिगत समीकरण पर रहेगा फोकस

जिलाध्यक्ष के चयन में जातिगत समीकरण का भी ध्यान रखा जाएगा। पार्टी की कोशिश रहेगी कि संगठन चुनाव प्रक्रिया में सभी जाति वर्ग को एडजस्ट किया जाए। जिन जिलों में विधायक-सांसद एक जाति विशेष के हैं, उन जिलों में जिलाध्यक्ष दूसरे जाति का ही चुना जाए। चुनाव अधिकारी का इस बात पर भी फोकस रहेगा।