एमपी में गठजोड़ की राजनीति शुरु, भाजपा सांसद दिल्ली तलब; अब बागियों पर टिकी निगाहें

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भोपाल।

एग्जिट पोल आने के बाद भापजा को तगड़ा झटका लगा है। एमपी समेत राजस्थान और छग में भी भाजपा को डर सता रहा है। पार्टी को अगर हार या फिर बहुमत से दूर का आंकड़ा मिलने की स्थिति में क्या रणनीति अपनाना है इसके लिए प्रदेश के दिग्गज नेता और सांसद की परेड दिल्ली होना शुरू हो गई है। पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शनिवार को बंगाल का दौरा भी रद्द कर दिया। अब केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और सांसद प्रभात झा को दिल्ली तलब किया गया है। सूत्रों के मुताबिक शाह दोनों नेताओं से मुलाकत कर एग्डिट पोल के बाद उपजे हालातों का फीडबैक लेंगे। शाह प्लान बी पर भी दोनों नेताओं से चर्चा करेंगे।

दरअसल, केन्द्रीय मंत्री और भाजपा चुनाव प्रबंधन समिति के संयोजक नरेन्द्र सिंह तोमर दिल्ली रवाना हुए है। वे शनिवार रात भोपाल के बीजेपी कार्यालय में बैठक में शामिल होने यहां पहुंचे थे। देर शाम उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज, प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह और तमाम खास मंत्रियों की एग्जिट पोल के नतीजों और प्रत्याशियों को लेकर चर्चा की । इस दौरान उन्होंने अबतक की स्थिति का फीडबैक भी लिया।वही प्लान बी और सरकार बनाने की रणनीति पर भी सहमति जताई। अब वे दिल्ली पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मिलने पहुंचे है, उनके साथ उपाध्यक्ष प्रभात झा भी दिल्ली गए है। खबर है कि आज वे अमित शाह से मिलकर अबतक का फीडबैक उन्हें देंगें और उसी को आधार मानकर आगे की रणनिति बनाएंगें।  

इधर सीएम ने प्रत्याशियों से लिया फीडबैक, दिए मतगणना के लिए खास टिप्स

दरअसल, आज मुख्यमंत्री शिवराज ने ऑडियो कांफ्रेंस मीटिंग के जरिए प्रत्याशियों से क्षेत्र का फीडबैक लिया और मतगणना के लिए कई खास टिप्स भी दिए। सीएम शिवराज ने कहा कि बीजेपी पर किसी तरीके का दबाव नहीं है। कांग्रेस काउंटिंग के दौरान बाधा पैदा करेगी, इसीलिए सभी प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं को काउंटिग में सावधानी रखनी जरूरी है। कांग्रेसी बौखलाहट में है इसलिए अनर्गल बात कर रहे है।मतगणना के दिन भी मुसीबत खड़ी कर सकती है, टेबल पर विवाद की स्थिति बनाएगी, इस बात का ध्यान रखे।कार्यकर्ताओं और प्रत्याशियों को हर हाल में वहा डटे रहना है और सही बात के लिए तैयार रहना है।  बताया जा रहा है कि इसके पीछे पार्टी का उद्देश्य मतगणना के दौरान सतर्कता बरतना और विरोधी दल को हावी न होने देना है।