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भोपाल| कमलनाथ सरकार के दो मंत्रियों के बीच चल रहा अंदरूनी विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। ये दोनों मंत्री सरकार के प्रवक्ता की सूची में शामिल हैं। इनके बीच विवाद की वजह भी चेहरा चमकाने को लेकर है। दोनों में से एक भी मंत्री चेहरा चमकाने का कोई मौका नहीं गंवाना चाहता है। हाल ही में हुए सरकारी आयोजन में जब एक मंत्री से मीडिया ने वाइट ली तो दूसरे मंत्री का मुंह फूल गया। उन्होंने तत्काल पत्रकारवार्ता बुलाने का फरमान दे दिया। इस घटनाक्रम के अगले दिन पहले मंत्री की ओर से सूचना जारी करवा दी कि वे मीडिया से मुलाकात के लिए सजह उपलब्ध रहेंगे। 

दरअसल इन दोनों मंत्रियों के बीच चल रहे घमासान के किस्से प्रशासनिक गलियारों में चटकारे लेते हुए सुनाई दे रहे हैं। बताया गया कि मंत्रियों के चल रहे विवाद का मामला मुख्यमंत्री तक भी पहुंच गया है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री ने कैबिनेट बैठक के बाद कुछ अफसरों को फटकार लगाई और कुछ मंत्रियों के विभाग बदलने के संकेत दिए। 

मंत्रियों को नसीहत लूज टॉक ना करें

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने मंत्रियों को नसीहत दी है कि वो लूज टॉक ना करें, यानी ऐसे बयान ना दें जिससे सरकार मुसीबत में घिर जाए। शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक के दौरान कमलनाथ ने मंत्रियों को एक पर्ची दी और कहा कि इसे अच्छी तरह से पढ़ ले। पर्ची में कई सारी हिदायतों के अलावा ये भी लिखा था कि सार्वजनिक स्थानों पर बोलते समय मंत्री संयम बरतें, लूज टॉक ना करें। कैबिनेट मीटिंग कब होनी है इसकी जानकारी दर्ज थी। इस महीने की कैबिनेट बैठके 7 15 और 26 फरवरी को संभावित है। जिसमें मंत्रियो की उपस्थिति अनिवार्य की गई है। साथ ही कहा कि मंत्री अपने प्रभाव वाले जिले और गृह नगर का भी ख्याल रखे सादगी से रहे फिजूलखर्ची रोक। विवादों से बचे, लोकसभा चुनाव सामने है ऐसे में विपक्ष को कोई मौका ना दें।

सिर्फ सात मंत्रियों को सरकार की बात रखने का अधिकार 

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सरकारी कामकाज का मीडिया में पक्ष रखने के लिए 7 मंत्रियों को अधिकृत किया है। जिसमें जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा भी शामिल हैं। प्रेस से चर्चा के लिए उनके अतिरिक्त संस्कृति एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री विजयलक्ष्मी साधौ, गृह मंत्री बाला बच्चन,  खेल एवं युवक कल्याण मंत्री जीतू पटवारी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री  सुखदेव पांसे, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जयवर्धन सिंह एवं वित्त मंत्री तरूण भनोट को अधिकृत किया गया हैं। मीडिया में लगातार दिए जाने वाले विवादित बयानों के चलते ये निर्णय लिया गया| अब केवल सात मंत्री ही मीडिया से रुबरु होंगें। इसके अलावा अन्य किसी मंत्री को मीडिया से बात करने की इजाजत नही होगी। बाकी 21 मंत्री मीडिया से कोई चर्चा नही करेंगें और ना ही सरकार की तरह से कोई पक्ष रखेंगें। हालाँकि इस आदेश के बाद कई मंत्री मीडिया से मुखातिब हुए|  इस फैसले पर बीजेपी ने सवाल उठाए है। बीजेपी का कहना है कि ये अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है , सभी मंत्रियों को अपनी राय रखने का अधिकार है।