इस सीट पर ब्राह्मण-क्षत्रिय उम्मीदवार सक्रिय, सिंधिया के खास का नाम भी शामिल

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भोपाल। लोकसभा चुनाव को लेकर अब दावेदार सक्रिय हो गए हैं। आम चुनाव में महज दो महीने बचे हैं। देश में आचार संहिता मार्च के पहले हफ्ते में लागू होने की संभावना है। राजनीतिक दलों ने उम्मीदवारोंं के नामों को लेकर भी मंथन शुरू कर दिया है। कांग्रेस में भी लोकसभा चुनाव को लेकर प्रत्याशियों के नामों का पैनल तैयार हो रहा है। इसके लिए कांग्रेसी नेता भी अपना अपना नाम पैनल में शामिल करवाने के लिए दौड़ लगा रहे हैं। ग्वालियर लोकसभा सीट से इस बार सिंधिया के चुनवा लड़ने की अटकलें तेज हैं। उनके अलावा इस सीट से कई और भी ब्राह्मण प्रत्याशी टिकट की रेस में शामिल हैं। 

दरअसल, कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की पंसद पिछले तीन बार से ज्ञानेन्द्र शर्मा माने जाते रहे हैं। वह सिंधिया का काफी करीबी भी हैं। लेकिन कांग्रेस हाईकमान को अपने भरोसे में लेने में अशोक सिंह कामयाब रहे हैं। इस बार पिछले कई दिनों से प्रत्याशी बदले जाने की संभावना है। सिंधिया समर्थक इस बार महाराज को चुनाव लड़वाने की मांग ककर रहे हैं। वहीं, सिंधिया ने इस बारे में फैसला पार्टी नेतृत्व पर छोड़ा है। राजनीतिक दृष्टिकोण से अगर देखा जाए तो कांग्रेस के पास अंचल के मुरैना एवं भिण्ड से कोई ऐसा प्रत्याशी दिखाई नहीं दे रहा जो पहली नजर में पसंद किया जा रहा हो। अंचल में सिंधिया की सहमति को ही अहमियत दी जाती है। ऐसे में अंचल की तीन लोकसभा सीटों से प्रत्याशी कौन होगा इसको लेकर उनकी सहमति अहम होगी। 

चौथी सीट गुना-शिवपुरी से वह स्वयं प्रत्याशी हो सकते हैं। ग्वालियर लोकसभा सीट काफी समय से कांग्रेस हार रही है । इस बार इस सीट पर कांग्रेस कब्जा करने के लिए रणनीति के साथ ही प्रत्याशी बदले जाने पर भी विचार कर सकती है। वैसे दावेदारों ने ग्वालियर लोकसभा क्षेत्र के प्रबल दावेदार अशोक सिंह को बारे में एक रिपोर्ट तैयार कर हाईकमान के पास भेज दी है। इस रिपोर्ट में सिर्फ अन्य दावेदारों के पास एक ही कारण बताने को है कि अशोक सिंह लगातार चुनाव हार रहे हैं। विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश में सरकार कांग्रेस की बन चुकी है। अब कई दावेदार ऐसे हैं जिन्होंने विधानसभा में टिकट मांगा था, लेकिन नहीं मिल सका था, इसलिए वह इस बार सिंधिया के भरोसे आगे चल रहे हैं।

दावेदारों ने शुरू की लॉबिंग

क्षत्रिय वर्ग से अगर देखा जाए तो मोहन सिंह राठोर ताल ठोक कर कई विधानसभा क्षेत्रों में अभी तक ब्लॉक स्तर पर बैठकें भी कर चुके हैं। उनको भरोसा है कि इस बार सिंधिया उनके नाम पर मुहर लगा सकते हैं। वहीं एक नाम ऐसा भी निकलकर आ रहा है जिसको लेकर कांग्रेस के अंदर भले ही चर्चा न हो रही हो, लेकिन सिंधिया उनको नाम पिछले तीन लोकसभा चुनाव में पैनल में भेज चुके है वह नाम है ज्ञानेन्द्र शर्मा का।