मकर संक्रांति 2021 : आज के दिन भूलकर भी ना करें ये काम, माने जाते है बहुत अशुभ

मकर संक्रांति के दिन महिलाओं को बाल धोने से बचना चाहिए।

मकर संक्राति

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। आज 14 जनवरी है यानि मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2021) का त्यौहार। आज के दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण (Uttarayan) होता है या सूर्य (Surya) के धनु से मकर राशि (Sagittarius to Capricorn) में प्रवेश करने के बाद इस पर्व की शुरूआत मानी जाती है। वही मकर संक्रांति से ही खरमास समाप्‍ति के साथ ही शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है।आज देशभर में पतंग (Kite) उड़ाई जाती है और घरों में खिचड़ी बनती है और खास तिल के लड्डू (Til Laddoo) भी खाए जाते हैं। वही इन दिन पूजा-पाठ के बाद दान का भी विशेष महत्व है, लेकिन कई ऐसे काम है जो इस दिन करने पर शुभ नहीं होते। तो आइए जानते हैं वो कौन से काम है जो संक्रांति के दिन भूलकर नही करने चाहिए….

  • मकर संक्रांति के दिन महिलाओं को बाल धोने से बचना चाहिए।
  • पुण्यकाल में दांत साफ नहीं करने चाहिए।
  • इस दिन किसी पेड़ पौधे की कटाई-छंटाई भी नहीं करनी चाहिए।
  • मकर संक्रांति के दिन किसी भी तरह के नशे जैसे सिगरेट, शराब, गुटका आदि से खुद को दूर रखें।
  • मसालेदार भोजन का सेवन भी न करें।
  • इस दिन तिल और मूंग दाल की खिचड़ी का सेवन करना अच्छा माना जाता है।
  • अगर आप घर में गाय भैंस पालते हैं तो मकर संक्रांति के दिन उनका दूध नहीं दुहना चाहिए।
  • इस दिन गलती से भी लहसुन, प्याज और मांस का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • मकर संक्रांति के दिन अगर आपके घर पर कोई भिखारी, साधु या बुजुर्ग आता है तो उसे घर से खाली हाथ न जाने दें।
  • दान में देने के लिए अगर तिल का कोई भी सामान हो तो और भी अच्छा होगा।
  • अगर सूर्य देव की कृपा पाना चाहते हैं तो इस दिन संध्या काल यानी सूरज ढलने के बाद अन्न का सेवन न करें।

मकर संक्रांति से जुड़ी अन्य यह भी जानकारियां

अलग अलग राज्यों में अलग अलग नाम

मकर संक्रांति को अलग-अलग प्रांतों में विभिन्न नामों से जाना जाता है। उत्तर भारत में इसे मकर संक्रांति, असम में बिहू (Bihu) और दक्षिण भारत में पोंगल पर्व (Pongal) के रुप में मनाया जाता है। गुजरात और राजस्थान में इसे उत्तरायण (Uttarayan) कहा जाता है। गुजरात में संक्रांति के दिन विशेष तौर पर पतंगबाजी का आयोजन होता है।वही हरियाणा, पंजाब व दिल्ली के कुछ स्थानों में लोहड़ी भी कहा जाता है।

क्या है इसके पीछे की कहानी

धर्म पुराणों में इस बात का जिक्र मिलता है कि मकर संक्रांति के दिन अपने पुत्र शनि से मिलने सूर्य देव उनके पास गए। उस वक्त शनि देव मकर राशि का स्वामित्व कर रहे थे। तब से ही इस दिन को मकर संक्रात के रूप में मनाया जाने लगा। माना जाता है कि इस खास दिन पर अगर एक पिता अपने बेटे से मिलने जाता है तो उनके यहां की सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं।

स्नान और दान का शुभ मुहुर्त

मकर संक्रांति गुरुवार को प्रात: 8 बजकर 30 मिनट बजे से आरंभ हो चुकी है। इसका पुण्य काल मुहूर्त सुबह 8.30 से लेकर शाम 5 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। वहीं, महापुण्य काल का मुहूर्त सुबह 8.30 से 10.15 तक का होगा। स्नान और दान-दक्षिणा जैसे कार्य इस अवधि में किए जा सकते हैं, जिसका बहुत ही महत्व और लाभ है। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन किया गया दान सौ गुना फल देता है। मकर संक्रांति के दिन घी-तिल-कंबल-खिचड़ी दान का खास महत्व है।