हॉर्स ट्रेडिंग पर पूर्व सीएम शिवराज का बड़ा बयान, ‘लंगड़ी सरकार बनाने के पक्ष में नहीं’

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भोपाल। मध्य प्रदेश की 15वीं विधानसभा का सत्र 7 जनवरी से शुरू होने वाला है। पांच दिन चलने वाले सत्र में कांग्रेस को शक्ति परीक्षण पास करना है। उससे पहले दिग्विजय सिंह ने बीजेपी पर हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका जताई थी। इस पर अब पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कमलनाथ की सरकार अल्पमत की सरकार है, पर संख्या बल में बीजेपी से ज्यादा है।  इसलिए पहले ही दिन हमने स्पष्ट कर दिया था कि बीजेपी सरकार नहीं बनाएगी। हम चाहते तो लंगड़ी सरकार बना सकते थे लेकिन मैंने कहा कि हम सिर्फ पूर्ण बहुमत से ही सरकार बनाएंगे। उन्होंने कहा कि इस तरह की आशंका करना बिल्कुल गलत है। जितना प्रोग्रेसिव रुख हमने अपनाया उतना किसी ने नहीं अपनाया।

दरअसल, राजनीति के गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि मध्य प्रदेश में भी कर्नाटक की तरह ही बीजेपी विधायकोंं की खरीद फरोख्त करने के प्रयास कर रही है। 15 साल का लंबा वनवास काटने के बाद सत्ता में आई कांग्रेस अब हर कदम फूंक फूंक कर रखना चाहती है। वह अपने सभी विधायकों के साथ साथ निर्दलीय और सपा-बसपा के विधायकों को भी एकजुट रखने की कोशिश कर रही है। वहीं, सूत्रों के मुताबिक पार्टी हर विधायकों की गतिविधि पर भी नजर रख रही है। कौन किस से मिल रहा है इस बात की सूचना प्रदेश हाईकमान को दी जा रही है। खबर है कि सत्र के लिए राजधानी पहुंचने वाले विधायकोंं के लिए कांग्रेस ने एक होटल भी बुक करवाया है। हालांकि, ये बुकिंग पर्टी के नाम से नहीं बल्कि किसी प्रईवेट कंपनी के नाम की करवाई गई है। कांग्रेस की कोशिश है कि वह अपने सभी विधायकों को बीजेपी से दूर रखे। 

सत्र से पहले कांग्रेस की अग्नी परीक्षा है। उसे सदन में बहुमत साबित करना है। उससे पहले किसी तरह की कोई गड़बड़ी न हो इसलिए पार्टी कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती। बसपा सुप्रीमो मायावती पहले ही समर्थन वापस लेने की धमकी दे चुकी हैं। वहीं, कुछ विधायकों को मंत्री मंडल में शामिल नहीं होने से उनमें असंतोष है। इससे वह नाराज हैं। ऐसे में वह पार्टी के लिए कोई परेशानी न बने इसलिए डैमेज कंट्रोल करने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। दिग्विजय सिंह डैमेज कंट्रोल करने और नाराजों को मनाने में जुटे हैं। हाल ही में उन्होंने एक बयान देकर सनसनी फैला दी थी। उन्होंने बीजेपी के तीन पूर्व मंत्रियों पर निर्दलीय और सपा-बसपा विधायकों की खरीद फरोख्त के आरोप भी लगाए थे।