बिजली कंपनी को सरकार का ‘करंट’, फिर बड़ी कार्रवाई की तैयारी

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भोपाल। प्रदेश में सरप्लस बिजली होने के बावजूद कटौती में हो रहे इजाफे पर सरकार ने सख्ती बरतना शुरू कर दिया है। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्मय से मुख्य सचिव एसआर मोहंती ने अफसरों को चेताया है कि अघोषित कटौती पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। साथ ही बिजली पॉवर हाउस पर तैनात भाड़े के कर्मचारियों को बाहर करें और ठेकेदार को अनुबंध खत्म किया जाए। साथ ही मुख्य सचिव ने बिजली अफसरों से कहा है कि कटौती के लिए वे खुद जिम्मेदार होंगे। 

मुख्य सचिव ने बिजली कंपनियों के अधिकारियों और  इंजीनियरों से वीडियो कॉफे्र्रंसिंग में दो टूक कहा कि कुछ जगहों पर बिजली जानबूझकर काटी जा रही है। जानबूझकर सप्लाई ठप की जा रही है। जिससे प्रदेश में बिजली कटौती के हालात पैदा किए जाएं। मुख्य सचिव ने बिजली कंपनियों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि कुछ जगहों पर जानबूझकर सप्लाई बटन स्विच ऑफ किए जा रहे हैं। जिसमें कुछ राजनीतिक दलों से लोग भी शामिल हो सकते हैं। इसकी जांच की जा रही है। जिन सेंटरों से ज्यादा समय तक बिजली काटी गई है, वहां उसकी विस्तार से जांच की जा रही है। बिजली काटने की वजह देखी जा रही है। यदि बेवजह बिजली काटी गई तो फिर संबंधित क्षेत्र के अधिकारी पर भी कार्रवाई होना तय है। यहां बता दें कि अघोषित बिजली को लेकर पिछले दिनों मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अफसरों को स्थिति सुधारने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मुख्य सचिव ने यह कार्रवाई की है।  

बिजली आपूर्ति पर खुफिया नजर 

मुख्य सचिव ने वीडियो कॉफ्र्रेंस में बिजली कंपनी के अफसरों से कहा कि जिन फीडरों पर ज्यादा समय तक कटौती की जा रही है। वहां खुफिया निगरानी रखी जाएगी। शहरों में अघोषित बिजली कटौती हो रही है। अब कटौती का पुख्ता कारण बताना होगा। 

इंदौर-उज्जैन में 174 पर गिरी गाज

इंदौर-उज्जैन संभाग में बिजली कटौती के चलते 174 बिजली कर्मचारी एवं अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। बिजली कंपनी में यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है, जब एक साथ इतनी बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारियों पर गाज गिरी है। इंदौर के 6 सहायक इंजीनियर और 10 लाइन मेन सहित 85 कर्मचारियोंं को निलंबित किया गया है। साथ ही 89 आउट सोर्स कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। अन्य अंचल में भी कार्रवाई होना है।