मप्र में पुजारियों को जल्द मिलेगी सौगात

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भोपाल।

किसानों के बाद प्रदेश की कमलनाथ सरकार मंदिर के पुजारियों को बड़ी सौगात देने जा रही है।कमलनाथ सरकार ने पुजारियों का मानदेय पांच गुना बढ़ाने का फैसला किया है, साथ ही अनुदान को भी बढ़ाया जाएगा।हालांकि पेंशन को लेकर स्थिति साफ नही हो पाई है। इस पर सरकार विचार कर रही है।  यह बात खुद कानून मंत्री पीसी शर्मा ने आज पत्रकारों से चर्चा के दौरान कही ।हालांकि मानदेय में पुजारियों का क्रायटेरिया क्या होगा यह अभी तय नही है, लेकिन मंत्री शर्मा ने कहा कि जो पुजारी पहले से चिन्हित है उसे पूरा लाभ दिया जाएगा। 

 दरअसल, लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अपने वचन पत्र में किए गए वादों को जल्द से जल्द पूरा करना चाहती है जिससे उसे आगामी चुनाव में लाभ मिल सके। इसलिए सरकार ने यह फैसला लिया है ।आज मीडिया से चर्चा के दौरान मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि एमपी में मंदिरों के पुजारियों का मानदेय बढ़ाया जाएगा। सरकार शीघ्र ही पुजारियों के मानदेय में पांच गुना तक वृद्धि करने जा रही है। उन्होंने मंदिरों के रख-रखाव और संरक्षण के लिए अनुदान भी दिए जाने की बात कही। शर्मा ने कहा कि संत पुजारियों एवं धार्मिक स्थलों से संबंधित समस्याओं का निराकरण शीघ्र ही किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने अध्यात्म विभाग का गठन किया है। सभी समस्याओं के निराकरण के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।  उसके बाद पेंशन देने पर विचार करेंगे। पहली प्राथमिकता मानदेय बढ़ाना है, इसलिए सरकार का फोकस इस पर है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस लोकसभा चुनाव से पहले जनता के बीच यह मैसेज पहुंचाना चाहती है कि वह धर्म के खिलाफ नहीं है, सभी धर्म कांग्रेस की नजर में समान है। कांग्रेस धर्म की राजनीति नही करती।

ईसाइयों पर लगे केस भी वापस लेगी सरकार

वही शर्मा ने कहा कि पिछले 15 वर्षों के दौरान बीजेपी शासन में ईसाइयों के खिलाफ दर्ज हुए राजनीतिक मामलों को भी वापस लिया जाएगा। जितने भी केस दर्ज हैं उनकी समीक्षा करेंगे । ईसाई समुदाय हो या मुस्लिम समुदाय जितने भी राजनीतिक विद्वेष से केस दर्ज हैं उन्हें  सरकार वापस लेगी।बताते चले कि बीते दिनों राष्ट्रीय ईसाई महासंघ के बैनर तले ईसाई समुदाय के लोगों का प्रतिनिधिमंडल कानून मंत्री पीसी शर्मा से मिलने पहुंचा था। मुलाकात के दौरान ईसाई समुदाय के लोगों ने कानून मंत्री को ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने कानून मंत्री से 3 प्रमुख मांग की थी, जिसमें साल 2003 से 2018 तक सूबे में ईसाईयों पर दर्ज मुकदमों की जांच की जाए, ईसाईयों को प्रताड़ित करने के उद्देश्य से दर्ज किए गए मामले वापस लिए जाए और झूठे मामले बनाने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए शामिल थी, जिसे पीसी शर्मा ने स्वीकार कर लिया है और केस वापस लेने की बात कही है।