एमपी में संघ शाखाओं पर ‘संकट’, सरकार उठाने वाली है ये कदम

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भोपाल। सरकारी स्थानों में आरएसएस की शाखाएं पर बैन लगाने पर अब कमलनाथ सरकार ने कवाय तेज कर दी है। अपने वचनपत्र के मुताबिक अब सरकारी स्थानों पर शाखाएं नहीं लगाई जा सकेंगी। सरकार इस काम को अमलीजामा पहनाने के लिए योजना तैयार कर रही है। अपनी घोषनापत्र के मुताबिक मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की शाखाओं में शामिल होने पर रोक लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों की मानें तो सामान्य प्रशासन विभाग इसकी कवायद में जुट गया है।

सूत्रों के मुताबिक सरकार ऐसा नियम बनाने जा रही है जिससे सरकार कर्मचारी संघ की शाखा में जाने से रोका जा सके। साथ ही वजन पत्र के मुताबिक सरकारी संस्थानों में भी शाखाओं का लगना भी रोका जाएगा। कांग्रेस ने इन दोनों कामों को पूरा करने के लिए अपने वचन पत्र में उल्लेख किया था।  जिस पर खूब हंगामा हुआ था। भाजपा ने इसे संघ पर प्रतिबंध लगाने से जोड़ते हुए चुनावी मुद्दा बनाया था, जिसका कुछ हद तक उसे फायदा भी हुआ लेकिन कांग्रेस की सरकार बनते ही अब इस वचन पर अमल करने के लिए मंत्रालय में तैयारी तेज हो गई है। 

कमलनाथ ने दी थी सफाई

इस ऐलान के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए इसे संघ पर प्रतिबंध से जोड़ दिया था। और जमकर हंगामा किया था। फिर सफाई में कमलनाथ ने कहा था कि ‘वचन पत्र’ में पार्टी ने या उन्होंने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की बात नहीं कही। कमलनाथ ने कहा कि पार्टी की ऐसी कोई मंशा भी नहीं है। कमलनाथ ने कहा था कि भाजपा जानबूझकर इस तरह के मुद्दों को हवा देकर जनता को भ्रमित करना चाहती है, ताकि हमारे ‘वचन पत्र’ के जनहितैषी मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके. उन्होंने भोपाल में पत्रकारों से कहा कि हमने कभी नहीं कहा कि हम आरएसएस पर प्रतिबंध लगाएंगे।  न हमारी ऐसी मंशा है. मैंने या कांग्रेस पार्टी ने कभी नहीं कहा कि हम आरएसएस पर प्रतिबंध लगाएंगे।

पहले भी सरकार ने लगाया है बैन

1993 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने विवादित ढांचा विध्वंस के बाद कर्मचारियों के संघ की शाखा में शामिल होने पर प्रतिबंध लगाया था. गृह मंत्रालय ने संघ की गतिविधियों पर रोक लगाने के आदेश जारी किए थे। 2000 में दिग्विजय सरकार में एक आदेश जारी किया था. आदेश में कहा गया था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं अन्य ऐसी संस्थाओं के कार्यकलापों में भाग लेना या उससे किसी रूप में सहयोग करना मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम का उल्लंघन माना जाएगा. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में सितंबर 2006 में यह प्रतिबंध हटा दिया गया था. इसमें दिग्विजय सरकार के आदेश को शिथिल कर दिया गया था।