अफसरों पर भी छाया सियासी रंग, कामकाज छोड़ पूछ रहे किसकी बन रही सरकार

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भोपाल। एग्जिट पोल ने प्रदेश में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले सभी की उत्सुकता को और बढ़ा दिया है। आम लोगों से लेकर सियासतदां भी एग्जिट पोल के गणित में उलझ गए हैं। नतीजों की बेचैनी सिर्फ यहीं नहीं है। मंत्रालय और वल्लभ भवन में भी अफसर नई सरकार किस दल की बन रही है कौन होगा अगला मुख्यमंत्री यही सवाल करते नजर आ रहे हैं। 

दरअसल, मंत्रालय और वल्लभ भवन के अफसर वहां बाहर से आने जाने वाले हर व्यक्ति से यही सवाल कर रहे हैं कि सरकार किसकी बन रही है कौन अगला मुख्यमंत्री हो सकता है। इसके पीछे उनका तर्क है कि बाहर से आ रहे व्यक्ति को इसकी जानकारी उनसे ज्यादा होगी। चुनाव आयोग के दफ्तर में भी हर कोई बस एक ही बात पूछ रहा है कि सरकार किसकी बनने जा रही है। मंत्रालय के विभागों का अलग अलग समय जायजा लिया गया। इस दौरान ज्यादातर शासकीय सेवक तो नदारद रहे, पर जो मौजूद मिले वह बस एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि अब किसकी सरकार बनने जा रही।

कुछ कर्मचारी भाजपा सरकार की सराहना करते हैं तो ज्यादा तो यही बोलते हैं कि बस 15 साल बहुत हैं। कुछ यह भी कहते हैं कि किसी भी पार्टी की सरकार बने लेकिन पूर्ण बहुमत नहीं हो। या फिर बहुमत से कुछ ही ज्या��ा हो, सरकार पर दबाव होना चाहिए। शासकीय सेवकों में इस बात को लेकर चर्चा ज्यादा है कि कोई भी सरकार हो वह निरंकुश नहीं होना चाहिए। लंबा वक्त होने पर नेता निरंकुश हो जाते हैं। वह किसी की परवाह नहीं करते ऐसे में आम लोग संकट में आ जाते।

सेकंड फ्लोर के अफसर के चैंबर खाली मिले। कई अफसर तो नियमित रूप से दिन में कभी कभार या फिर बैठक के समय आते हैं और बैठक के बाद नदारद। कुछ अफसर तो दूसरी पाली में आते ही नहीं। वह बस यही कहते हैं कि काम ही नहीं है आचार संहिता में कामकाज ठप है।