GST काउंसिल की बैठक में नरोत्तम ने की केंद्रीय वित्तमंत्री से चर्चा,क्षतिपूर्ति फंड में ऋण देने की मांग

भोपाल

लॉकडाउन के बाद गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) काउंसिल की पहली बैठक शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (video conferencing) के ज़रिए हुई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (nirmala sitaraman) की अगुवाई में जीएसटी काउंसिल (GST council) की बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई जिसमें राज्यों के वित्त मंत्रियों ने शिरकत की। मध्यप्रदेश से गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) इस बैठक में शामिल हुए। उन्होने केंद्र द्वारा प्रदेश को जीएसटी की 1386 करोड़ की राशि प्रदान करने के लिये आभार जताया। इस अवसर पर नरोत्तम ने कोरोना काल में फिलहाल रोजगार की बेहद आवश्यकता है। इसलिए क्षतिपूर्ति के फंड में ऋण की व्यवस्था हो जाए और जो कर्ज 3 से 5 प्रतिशत बढ़ाया है, उसमें जो शर्तें लगाई गई हैं उनमें रिलीफ की मांग भी की। साथ ही उद्योगपतियों से चर्चा के दौरान सामने आई बात कि डॉक्टरी उपकरण खरीदने में लाभ नहीं मिलता लेकिन जीएसटी देना पड़ता है। वहीं बिल्डर्स से चर्चा में सामने आया कि उन्हें 12 प्रतिशत जीएसटी लगता है, नरोत्तम मिश्रा ने इस 12 प्रतिशत को घटाकर 9 प्रतिशत करने की मांग की है। इस बैठक में टैक्स रेवेन्यू पर कोविड-19 के प्रभाव पर भी चर्चा की गई।

इस बैठक से पहले नरोत्तम मिश्र द्वारा सभी व्यापार जगत के लोगों से सुझाव मांगे गए थे और अब उनके द्वारा प्रदान सुझाव केंद्रीय वित्तमंत्री तक पहुंचाए जाएंगे। उन्होने मध्यप्रदेश में रोजगार संवर्धन, GST से संबंधित परेशानी और सुझाव को लेकर उद्योगपतियों से चर्चा की थी। कोविड 19 के बाद उत्पन्न हालातों में अधिकतम लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है, इसे लेकर भी उद्योगपतियों से विस्तृत चर्चा हुई।

इन उद्योगपतियों में सुनील बंसल, राजीव अग्रवाल, मनोज मोदी, अमरजीत सिंह, एन. एल. गुर्जर, अनिरुद्ध चौहान, डॉ.राहुल खरे , बीएस यादव, डॉ. उमेश शारदा, सुरेंद्र मित्तल और श्री प्रदीप मित्तल बैठक में मौजूद रहे।

जीएसटी काउंसिल की पिछली बैठक 14 मार्च को हुई थी
जीएसटी काउंसिल की पिछली 14 मार्च को हुई थी जिसमें निर्मला सीतारमण ने कहा था कि केंद्र सरकार मुआवजे की जरूरत को पूरा करने के लिए काउंसिल की ओर से बाजार से कर्ज जुटाने की कानूनी वैधता पर गौर करेगी। जीएसटी कानून के तहत राज्यों को एक जुलाई, 2017 से जीएसटी के क्रियान्वयन के बाद पहले पांच साल तक राजस्व नुकसान की भरपाई की गारंटी दी गई है। जीएसटी स्ट्रक्चर के तहत पांच टैक्स स्लैब 5, 12, 18 और 28 फीसदी है।