नरोत्तम मिश्रा का कांग्रेस पर तंज, किसे कहा थका हुआ और किसे कहा पका हुआ नेता, पढ़ें पूरी खबर

Narottam Mishra’s taunt on Congress : चुनावी साल में नेताओं के बीच बयान युद्ध छिड़ा हुआ है, अपनी अपनी पार्टियों को जनता की सबसे बड़ी हितैषी बताते हुए भाजपा और कांग्रेस के नेता एक दूसरे पर हमलावर हैं। भोपाल में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए गृह मंत्री एवं सरकार के प्रवक्ता डॉ नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में अब दो ही नेता बचे हैं, एक पका हुआ और एक थका हुआ….

इन दो नेताओं का बताया पका हुआ और थका हुआ 

प्रदेश सरकार के प्रवक्ता डॉ नरोत्तम मिश्रा आज अपनी नियमित प्रेस ब्रीफिंग में पत्रकारों के सवालों के जवाब दे रहे थे। पत्रकार ने सवाल किया कि दिग्विजय सिंह और कमल नाथ ने ट्वीट किया है कि “गर्व से कहो हम हिन्दू हैं, बेवकूफ नहीं”है। इस सवाल का जवाब देते हुए डॉ नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस में अब दो ही नेता बचे हैं, एक दिग्विजय सिंह  जी जिनसे जनता पक गई है एक कमल नाथ जी जो थक गए हैं। एक पका हुआ है और एक थका हुआ है।

हिन्दुओं से जुड़े ट्वीट पर किया पलटवार 

उन्होंने कहा कि जब भी हिन्दू का अपमान होता है ये दोनों नेता चूकते नहीं है इनकी सरकार आ जाये तो हिन्दू समझदार और भाजपा की सरकार आ जाये तो हिन्दू बेवकूफ हैं, गृह मंत्री ने तंज कसा कि जब ये ओसामा को ओसामा जी कहते तो इसे हिन्दू मानते हैं ये राम मंदिर की तारीख पर सवाल उठाने को हिंदुत्व मानते हैं, राम सेतु और राम को काल्पनिक कहने को ये हिन्दू मानते हैं, ये जाकिर नाइक को शांति दूत कहने को हिन्दू मानते हैं। डॉ नरोत्तम मिश्रा ने कहा इन दोनों ने ये जो दुस्साहस किया है बेवकूफ कहने का, ये कहीं युवराज (राहुल गांधी) पर तो उंगली नहीं उठा रहे, इनका इशारा उनकी तरफ तो नहीं है।

जनता सब जानती है कि कमल नाथ जी क्या स्वांग कर रहे हैं : नरोत्तम 

कमल नाथ द्वारा कल श्रमिक संगठनों और आज स्वास्थ्य कर्मचारियों के प्रतिनिधियों से चर्चा करने के सवाल पर डॉ नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि चुनावी साल में ही कमल नाथ जी और कांग्रेस को ये ध्यान आता है पिछले साढ़े चार साल में, अपनी सरकार के डेढ़ साल में तब किसी से बात नहीं की, अब चुनावी साल आ गया तो हिन्दू पर सवाल, स्वास्थ्य कर्मियों से चर्चा, 1 मई को कर्मचारियों की छुट्टी का वादा, लेकिन जनता सब जानती है कि कमल नाथ जी क्या स्वांग कर रहे हैं।


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Atul Saxena

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पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं ....

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