मप्र में यूरिया पर फिर सियासत, संकट में किसान

भोपाल। प्रदेश में सत्ता बदलते ही यूरिया खाद का संकट गहराने लगा है। कांग्रेस सरकार आते ही पिछले साल भी यूरिया संकट के हालात बने थे। इस बार फिर किसान यूरिया के लिए सड़क पर लाइन में लगने को मजबूर है। फिलहाल इस समस्या का राज्य सरकार के पास कोई समाधान नहीं दिख रहा है, लेकिन यूरिया को लेकर सियासत शुरू हो गई है। भाजपा ने सरकार पर किसाना विरोधी होने के गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं कांगे्रस ने केंद्र सरकार पर यूरिया कोटे में कटौती करने और यूरिया की सप्लाई में देरी के आरोप लगाए हैं। 

रबी फसल के लिए यूरिया की मांग शुरू हो गई है। हालांकि पिछले साल की अपेक्षा मप्र को अभी तक यूरिया का ज्यादा मात्रा में स्टॉक मिल गया है, इसके बावजूद भी यूरिया की कमी बताई जा रही है। यदि यूरिया आपूर्ति का यही हाल रहा तो दिसंबर और जनवरी में किसान यूरिया के लिए सड़क पर उतरकर आंदोलन कर सकता है। हालातों से निपटने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र से दिसंबर के लिए 2.49 लाख मीट्रिक टन यूरिया का अतिरिक्त कोटा मांग लिया है। 

मुख्यमंत्री की ओर से केंद्र को पत्र भी लिखा गया है। प्रदेश को एक अक्टूबर से 30 नवंबर तक आठ लाख 76 हजार मीट्रिक टन यूरिया मिल जाना चाहिए था लेकिन छह लाख 85 हजार ही दिया गया। इसमें भी दो लाख मीट्रिक टन एक-दो दिन में प्रदेश के विभिन्न् हिस्सों में आएगा। 

सड़क पर किसान, टवीटर पर नेता

यूरिया के लिए किसान सड़क पर उतर गए हैं। वहीं नेताओं के बीच टवीटर पर आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने यूरिया के लिए दुकानों पर लंबी लाइनें लगाने को कालाबाजारी से जोड़ा तो प्रदेश कांग्रेस ने मोदी सरकार पर किसान विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट पर लिखा कि सच तो यह है कि सरकार किसानों को तबाह और बर्बाद कर रही है। पहले कर्जमाफी का झूठा वादा किया, बोनस व राहत राशि के लिए तरसाया और अब यूरिया के लिए तरसा रहे हैं। 24 घंटे किसान लाइन में लगा है। सरकार कह रही है कि यूरिया पर्याप्त मात्रा में है। वहीं मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट पर लिखा  है कि प्रदेश में यूरिया का संकट नहीं है। 

इसलिए बिगड़े हालात

प्रदेश सरकार ने यूरिया के स्टॉक से लेकर आपूर्ति करने में लापरवाही बरती है। अभी तक राज्य सरकार किसानों से समय पूर्व भंडारण कराती आ रही है, लेकिन राज्य सरकार इस बार ऐसा नहीं कर पाई। यही वजह रही कि पिछले साल भी यूरिया का संकट था। इस बार यूरिया के भंडारण भी संभावना है। यही वजह है कि  यूरिया की कमी हो गई और किसान सड़क पर उतर आया है|