सीएए एनआरसी विरोध में मुशायरे में पहुंचे राहत इंदौरी और मंज़र भोपाली, चारमीनार का जीता दिल

भोपाल। खान अशु।

देशभर में जारी सीएए एनआरसी विरोध में किए जा रहे कार्यक्रमों के बीच शायरों ने अपनी अलग दलील खड़ी कर ली है। दिल्ली के शाहीन बाग से लेकर भोपाल के इक़बाल मैदान तक में शायरों के इंकलाबी कलाम जहां मुहिम को गहराई और ऊंचाइयां दे रहे हैं, वहीं प्रदर्शनकारियों में जोश और उत्साह भी भर रहे हैं। इसी कड़ी में चारमीनार के शहर हैदराबाद में हुए कार्यक्रम में मप्र के दो नामचीन शायरों डॉ राहत इन्दौरी और मंज़र भोपाली ने अपने जोशीले अंदाज से महफ़िल में नई जान फूंक दी। कार्यक्रम का आयोजन ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के सदर असदुद्दीन ओवैसी की जानिब से किया गया था।

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर हैदराबाद में एक अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। शायरों और कवियों ने सीएए पर कविता और शायरी के जरिये अपने  गुस्से का इज़हार किया। हजारों लोगों ने कविता, कव्वाली और व्यंग्य के रूप में ऐतिहासिक चारमीनार के पास स्थित खिलवत मैदान में सरकार पर निशाना साधा, पुलिस की ज्यादती और सांप्रदायिकता की निंदा की। प्रमुख शायरों में डॉ राहत इंदौरी, मंजर भोपाली, शबीना अदीब और संपत सरल ने भारी भीड़ के बीच अपनी कविताओं से लोगों का दिल जीत लिया।

लोगों की मांग पर राहत इंदौरी ने अपनी मशहूर ग़ज़ल “किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है” भी पढ़ी। कुछ लोगों द्वारा इसे मुस्लिम कवि की कविता के रूप में चित्रित करने के प्रयासों की निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि यह उन सभी सच्चे भारतियों की आवाज है, जिन्होंने इस राष्ट्र के निर्माण के लिए अपना खून बहाया। उन्होंने कहा कि वह ”जिहादी ” कहे जाने से बहुत पीड़ित थे। डॉ राहत की बात को आगे बढ़ाते हुए जब मंजर भोपाली ने अपनी ग़ज़ल, “ताकतें तुम्हारी हैं, और खुदा हमारा है…” पढ़ी तो माहौल तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान हो गया। कार्यक्रम में शबीना अदीब ने अपने अनूठे अंदाज में अपनी कविता हिन्द ये हिन्दुस्तान हमारा है ’सुनाई।

एएमआईएम के सदर और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। यह कार्यक्रम मूल रूप से चारमीनार में आयोजित होने वाला था, लेकिन पुलिस ने यहाँ इज़ाज़त न देते हए इसे ख़िलावत मैदान में स्थानांतरित करने के लिए कहा।

पूना में भी बिखरा प्रदेश के शायरों का जलवा
इधर महाराष्ट्र के पूना शहर में आयोजित एक अन्य मुशायरे के दौरान मप्र के दो दिग्गज शायरों डॉ मेहताब आलम और डॉ अंजुम बाराबंकवी ने अपने कलाम का जादू बिखेरा। गणतंत्र दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश की एक और शायरा डॉ नुसरत मेहदी भी शिरकत करने वाली थीं लेकिन अचानक उन्होंने कार्यक्रम में पहुंचने में अपनी असमर्थता जता दी।