BHOPAL-मानसून से पहले SDERF ने बनाया एक्शन प्लान, आपदा से निपटने को तैयार जवान

बाढ़ एवं आपदा से निपटने के लिए स्टेट कमांड सेंटर स्थापित किया गया है। इसके अलावा नागरिकों की सुरक्षा और सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं।

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BHOPAL NEWS :  मध्य प्रदेश पुलिस बारिश के मौसम में किसी भी आपदा के निपटने के लिए मुस्तैद हो चुकी है। मानसून के पहले राष्ट्रीय आपदा आपातकालीन मोचन बल (एसडीईआरएफ) ने अपना एक्शन प्लान तैयार कर लिया है। बाढ़ और फ्लैश फ्लड की घटनाओं के दौरान होने वाली जानमाल की हानि से नागरिकों को बचाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

अधिकारियों ने दिए निर्देश 

डीजी होमगार्ड अरविंद कुमार ने अतिवृष्टि एवं बाढ़ से निपटने की पूर्व तैयारियों के संबंध में प्रदेश के सभी संभागों के डिवीजनल कमांडेंट, वरिष्ठ अधिकारियों और कार्यालय प्रमुखों को हर पल चौकस रहने के निर्देश भी दिए हैं। बाढ़ एवं आपदा से निपटने के लिए स्टेट कमांड सेंटर स्थापित किया गया है। इसके अलावा नागरिकों की सुरक्षा और सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। टोल फ्री नंबर 1079, 1070 तथा लैंडलाइन नंबर 7648861040, 7548861050, 7648861060, 7648861080 पर कॉल कर मदद मांगी जा सकती है। एसडीईआरएफ के जवान हर चुनौती का डटकर सामना कर सकें, इसके लिए उन्हें पुणे में 40 दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया है। एसडीईआरएफ के 50 जवानों का पहला बैच 12 अप्रैल को पुणे भेजा गया था, जो 21 मई को लौट आया है। 28 मई को 50 जवानों के दूसरे बैच को प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है। बाढ़, अतिवृष्टि और आपदा की स्थिति में बचाव कार्य के लिए जवानों को क्षमता वृद्धि एवं कौशल उन्नयन के लिए उच्च कोटि का प्रशिक्षण राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण संस्थानों में करवाया गया है। जवान यहां मोटरबोट हैंडलिंग, स्वीमिंग, डीप डाइविंग, बाढ़ के दौरान उपयोग आने वाली अन्य तकनीकों आदि का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

 

आपदा की स्थिति में समुचित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करें : डीजी होमगार्ड

डीजी होमगार्ड अरविंद कुमार ने विभिन्न संभागों के डिवीजनल कमांडेट और अन्य अधिकारियों की वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक ली। इस बैठक में उन्होंने ईओसी को पुन: सक्रिय किए जाने, डीआरसी डिवीजनल रिजर्व और डीजी रिजर्व के गठन, क्यूआरटी व एसडीईआरएफ टीम की तैनाती, बाढ़ बचाव में उपलब्ध बचाव सामग्री व उपकरणों की समीक्षा एवं अन्य आवश्यक मांग, अन्य बचाव दलों से समन्वय, कार्यालय से डीडब्ल्यूआरएस पोर्टल में पंजीकृत संख्या व ज्ञात समस्याएं तथा आपदा मित्रों को राहत बचाव कार्य में शामिल किए जाने के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि मानसून से पूर्व कलेक्टर, नगर पालिका, जिला पंचायत, जल संसाधन विभाग, मौसम विभाग तथा पुलिस एवं प्रशासन के आपदा प्रबंधन कार्य हेतु नियुक्त नोडल अधिकारियों से समन्वय स्थापित करें और बाढ़ एवं आपदा की स्थिति में समुचित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करें। टोल फ्री और लैंडलाइन नंबरों का आमजन में व्यापक प्रचार-प्रसार करें। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नदी, तालाब, नालों, पुल-पुलिया और रपटों पर पानी बहने पर खतरे की स्थिति में आवागमन रोकें और अन्य विभागों से समन्वय कर चेतावनी बोर्ड लगाएं।

 

खतरे की आशंका पर तत्काल दें सूचना

डीजी अरविन्द कुमार ने सभी जिला इकाइयों में आपदा राहत के सूचना तंत्र को मजबूत बनाने और मछुआरों, तैराकों, गोताखोरों, नाविकों, पूर्व अनुभवी व प्रशिक्षित जवानों तथा आईआरओ के नाम, पते व मोबाइल नंबर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने अतिवृष्टि के समय बांधों से छोड़े जाने वाले पानी की मॉनिटरिंग करने और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने की सूचना तत्काल डीडब्ल्यूआरएस पोर्टल पर अपडेट करने के साथ ही वल्लभ भवन में व्हीबीएसआर, कॉमन अलर्ट प्रोटोकॉल, ईआरएसएस, स्टेट कमांड सेंटर, सभी वरिष्ठ अधिकारियों को और जिला स्तर पर स्थापित जिला स्तरीय कंट्रोल रूम डीसीसीसी पर तुरंत भेजना सुनिश्चित करें।

 

युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू

एसडीईआरएफ के कमांडेंट कमलकांत ध्रुवे ने बताया कि मौसम विभाग द्वारा जारी सूचना के आधार पर मानसून के दृष्टिगत बाढ़ की स्थिति निर्मित होने को लेकर एसडीईआरएफ ने युद्धस्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। इसके अंतर्गत जिला स्तर पर सूचना संकलन केन्द्र के रूप में आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम (इमरजेंसी ऑपरेटिंग सेन्टर) स्थापित किए जाएंगे, जो चौबीस घंटे मौसम विभाग व जिले की स्थिति पर नजर रखेंगे। साथ ही समस्त विभागों के साथ-साथ क्यूआरटी व डीआरसी से समन्वय स्थापित करेंगे। उन्होंने बताया कि आज से प्रदेश के सभी बाढ़ प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों और तहसीलों में डीआरसी (डिजास्टर रिस्पॉन्स सेंटर) की और जिला मुख्यालयों पर ईओसी (इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर) की स्थापना कर दी जाएगी। प्रत्येक जिले के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीमें भी बाढ़ से बचाव में उपयोग आने वाले उपकरणों से पूर्ण सुसज्जित वाहनों के साथ तैयार हैं। इसके अतिरिक्त सिविल डिफेंस वॉलेंटियर, तैराक दल व गोताखोरों को भी चिन्हित किया गया है, जिन्हें बाढ़ की स्थिति होने पर उपयोग किया जायेगा।

 

बाढ़ से बचाव के लिए नागरिकों को किया जा रहा जागरूक

बाढ़ से बचाव के लिए प्रदेशभर के विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों, विभिन्न संस्थानों, ग्राम पंचायतों और अन्य बाढ़ प्रभावित स्थानों पर मार्च माह से ही जन-जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। प्रशिक्षण में बाढ़ के दौरान किस तरह की तकनीकें अपनाकर परेशानी से बचा जा सकता है, इसके बारे में लोगों को जानकारी दी जा रही है। इसके अतिरिक्त प्रदेश मुख्यालय में डॉक्टर, पुलिस अधिकारियों, जवानों, इंजीनियर, शिक्षक और विभिन्न संस्थानों के सदस्यों के समूहों को आमंत्रित कर उन्हें यहां 2 से 3 घंटे की क्लास के दौरान बाढ़ से बचने का डेमो देकर बाढ़ से बचाव में उपयोग आने वाले उपकरणों के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। साथ ही एसडीईआरएफ के इंटिग्रेटेड अलर्ट सिस्टम “सचेत” के माध्यम से बाढ़ एवं आपदा संबंधी अलर्ट भी जारी किए जा रहे हैं।

 

विभिन्न बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में डीआरसी तैनात

एसडीईआरएफ द्वारा मध्य प्रदेश के सभी जिलों में विभिन्न बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में डीआरसी (डिजास्टर रिस्पॉन्स सेंटर) तैनात की गई है, जिनमें सीहोर, राजगढ़, विदिशा, रायसेन, इंदौर, छिंदवाड़ा, नर्मदापुरम, उज्जैन, नरसिंहपुर में प्रमुख हैं। राज्य के प्रत्येक जिले में मौसम और परिस्थितियों के आधार पर टीमों में जवानों की तैनाती की गई है। सभी जवानों को स्नैक कैचर, लाइफबॉय, लाइफ जैकेट, रिफ्लेक्टिव जैकेट, डीप डाइविंग किट, रबर बोट, एलुमिनियम मोटरबोट, एचडीपीई बोट (प्लास्टिक), फायबर बोट, रस्सा, अस्का लाइट, ड्रैगन टॉर्च, गमबूट, ग्लव्स, हेलमेट, तंबू और फर्स्ट एड बॉक्स सहित आपदा प्रबंधन में उपयोग आने वाली वस्तुएं उपलब्ध करवाई गई हैं। ऐसे स्थान जहां जवानों का सहायता के पहुंचना संभव नहीं हो, वहां के लिए ग्वालियर में सेना का हेलीकॉप्टर तैनात है, जो डीजी या डीआईजी की अनुमति मिलने के पश्चात आवश्यकता पड़ने पर 30 से 45 मिनट में मदद के लिए पहुंच जाएगा। इसी कड़ी में राज्य के उज्जैन, जबलपुर, खंडवा और नर्मदापुरम में एसडीईआरएफ की टीमों ने 14 जून को मॉकड्रिल की। इस मॉकड्रिल के दौरान सभी जिलों की टीमों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आपदा प्रबंधन की बारीकियां सीखीं।

 


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Sushma Bhardwaj

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