भोपाल| कांग्रेस शासनकाल (Congress Government) के दौरान शुरू हुई वार्डों के विस्तार की कवायद पर शिवराज सरकार (Shivraj Government) ने रोक लगा दी है| राज्य शासन द्वारा 77 नगरीय निकायों के वार्डों के विस्तार की अधिसूचनाएँ निरस्त कर दी गई हैं। गौरतलब है कि जनगणना-2021 के दृष्टिगत एक जनवरी, 2020 के बाद प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं में परिवर्तन का प्रतिषेध किया गया है।

राज्य शासन द्वारा नगरीय निकाय लटेरी, छतरपुर, महाराजपुर, बड़ागाँव, आष्टा, नागदा, अमरवाड़ा, उन्हेल, पिपलौदा, आगर, न्यूटन चिखली, बड़नगर, आलमपुर, बदनावर, मिहोना, तराना, कानड़, बड़ौद, खाचरौद, माकडोन, दबोह, सिंगरोली, छिंदवाड़ा, आलोट, सोयतकला, सांवेर, महूगाँव, मानपुर, हातोद, देपालपुर, बेटमा, राऊ, गोतमपुरा, सोनकच्छ, पिपलरवा, बागली, करनावद, टोंकखुर्द, भौरासा, हाटपिपल्या, सिरोंज, राजगढ़, ब्यौहारी, जबलपुर, हनुमना, मनगवां, बैकुंठपुर, जीरापुर, बैतूल बाजार, सिरमौर, उमरिया, सुठालिया, टीकमगढ़, खिलचीपुर, शुजालपुर, विदिशा, मक्सी, माचलपुर, रतलाम, गोविंदगढ़, त्यौंथर, चाकघाट, खुजनेर, नईगढ़ी, सेमरिया, आरोन, ब्यावरा, जावर, इछावर, कोठरी, गुना, सुसनेर, लहार, पिछोर, मऊगंज, देवेन्द्र नगर और नगरीय निकाय खांड़ के वार्डों के विस्तार की अधिसूचना को निरस्त कर दिया गया है।

बता दें कि कमल नाथ सरकार ने वार्डों के विस्तार से संबंधित निर्णय लिया था। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने परिसीमन को लेकर प्रस्ताव भी बुलाए थे। कांग्रेस सरकार के वार्डों के विस्तार के निर्णय को लेकर सियासी बवाल मचा था। भाजपा नेताओं का आरोप था कि बीते नगरीय निकाय चुनाव में प्रदेश की अधिकांश निकायों पर भाजपा का ही कब्जा रहा। ऐसे में कांग्रेस सरकार ने वार्डों के परिसीमन के नाम पर जोड़-तोड़ की राजनीति की थी।