निलंबित IPS की चिट्ठी, सिर्फ मीडिया ट्रायल के आधार पर सस्पेंड कर देना विधिसंगत नहीं

पुरुषोत्तम शर्मा ने कार्रवाई के खिलाफ मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, आईपीएस एसोसिएशन और डीजीपी को पत्र लिखकर निलंबन को गलत बताया

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| पत्नी से मारपीट का वीडियो वायरल होने के बाद निलंबित किये गए डीजी रैंक के अफसर पुरुषोत्तम शर्मा (Purushottam Sharma) ने कार्रवाई के खिलाफ मुख्यमंत्री (Chief Minister) गृहमंत्री (Home Minister)  आईपीएस एसोसिएशन (IPS Association) और डीजीपी (DGP) को पत्र लिखकर निलंबन की करवाई को गलत बताया है| पत्र में उन्होंने कहा कि अब तक कितने आईएएस और आईपीएस के आपत्तिजनक वीडियो आ चुके हैं, लेकिन आज तक कार्रवाई नहीं की गई। मैंने तो अपनी रक्षा में पत्नी का सामना किया। मैंने समय पर जवाब दिया। उसके बाद भी तथ्यों को बिना जांचे सिर्फ फैसला कर दिया गया है।

पत्र में उन्होंने कहा कि मेरे जवाब के संपूर्ण तथ्यों का परीक्षण नहीं किया गया| जिसने मैंने स्पष्ट रुप से लिखा था कि मेरे विरुद्ध कोई भी आपराधिक प्रकरण अथवा किसी प्रकार की शिकायत एवं जांच पंजीबद्ध नहीं है| प्रथम वीडियो में मेरी पत्नी द्वारा महिला के घर में घुसकर उनके बेडरूम का वीडियो बनाकर एवं उनसे अनुचित प्रश्न पूछ कर उनके चरित्र पर लांछन लगाते हुए वीडियो वायरल किया| इस वीडियो के संबंध में सारे तथ्य मेरे स्पष्टीकरण में संलग्न है फिर भी मेरी पत्नी के सभी अनैतिक कार्यों को सरकार ने नहीं देखा|

साजिश के तहत कैमरा लगाकर वीडियो बनाया
आईपीएस शर्मा ने कहा कि मेरी पत्नी ने 4 से 5 इंच की धारदार कैंची से मुझे मारने की धमकी दी एवं विभिन्न प्रकार से मुझे उकसाया तथा जानबूझकर हिडन कैमरा से वीडियो रिकॉर्डिंग की और यह पूरा षड्यंत्र उनके द्वारा मुझे व्यावसायिक क्षति पहुंचाने की इच्छा से था| स्वयं मेरी पत्नी ने कैंची से हमला करना स्वीकार किया है एवं मेरी चोटों के बारे में भी पुष्टि की| यह वीडियो एक साजिश के तहत कैमरा लगाकर बनाई गई|उन्होंने कहा यह मामला महिला प्रताड़ना का ना होकर एक पुरुष के ऊपर प्राणघातक आक्रमण का है|

कई आईएएस और आईपीएस के आपत्तिजनक वीडियो आए, लेकिन निलंबन नहीं हुआ
पुरुषोत्तम शर्मा ने पत्र में कहा कि अब तक कितने आईएएस और आईपीएस के आपत्तिजनक वीडियो आ चुके हैं, लेकिन आज तक कार्रवाई नहीं की गई। राज्य शासन ने उन्हें कभी निलंबित नहीं किया| यह वीडियो मात्र घरेलू विवाद से संबंधित है और मीडिया में इस को बढ़ा चढ़ा कर अपनी ओर से दिखाया है| मात्र मीडिया ट्रायल के आधार पर पुलिस महानिदेशक जैसे वरिष्ठम स्तर के अधिकारी को तत्काल निलंबित कर देना विधि संगत नहीं है|

किसी भी अफसर के खिलाफ हो सकता है षड्यंत्र
इस तरह की कार्रवाई किसी भी अफसर के साथ हो सकती है, उनके खिलाफ षडयंत्र पूर्वक वीडियो बनाकर वायरल करना एवं दुर्भावना पूर्वक ग्रस्त होकर शिकायत कर बिना जांच के निलंबन किया जा सकता है| इस मुद्दे को आईपीएस एसोसिएशन में उठाकर मुख्यमंत्री को मेमोरेंडम प्रस्तुत किया जाना आवश्यक है|

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