इन दो सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले के आसार, बीजेपी-कांग्रेस के लिए चुनौती

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भोपाल। लोकसभा चुनावों में बुंदेलखंड की दो सीटों पर सपा-बसपा का गठबंधन भाजपा और कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती के संकेत दे रहा है। इस गठजोड़ में खजुराहो और टीकमगढ़ सीट सपा के खाते में हैं। जहां पूरी तरह त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बन गये हैं। कारण है कि सपा की ताकत बढ़ाने के लिए बसपा से जुड़ा दलित वोट बैंक भी सहारा बनने की ओर इशारा कर रहा है।

उत्तर प्रदेश के सीमाई इलाकों से सटी इन दोनों संसदीय सीटों के कुछ विधानसभा क्षेत्रों में सपा का शुरूआती दौर से खासा प्रभाव रहा है। खजुराहो संसदीय सीट में चंदला और राजनगर विधानसभा क्षेत्रों में समाजवादी पार्टी समय-समय पर अपनी दमदारी दिखाती रही है। 90 के दशक में तो सपा ने चंदला सीट से अपना उम्मीदवार जिताकर प्रदेश में खाता खोला था। 1997 में यहां से उप चुनाव में विजय बहादुर सिंह बुंदेला समाजवादी पार्टी से विधायक चुने गये थे। राजनगर के मौजूदा सत्ताधारी कांग्रेस विधायक विक्रमसिंह नातीराजा ने भी अपना पहला विधानसभा चुनाव साइकिल पर सवार होकर ही जीता था। हालांकि उन्होंने यह चुनाव में छतरपुर सीट से लड़ा था, पर उस समय भी यह सीट खजुराहो संसदीय क्षेत्र में ही थी। परिसमीमन के बाद छतरपुर खजुराहो से अलग हुआ था। इस क्षेत्र में बसपा का प्रदर्शन विधानसभा और लोकसभा में हमेशा कमजोर रहा है। इधर टीकमगढ़ संसदीय क्षेत्र की बात करें तो यहां भी सपा विधानसभा चुनावों में ताकतवर रही है। यहां निवाड़ी सीट से 2003 के विधानसभा चुनाव में मीरा यादव समाजवार्दी की विधायक चुनकर सदन तक पहुंचीं थीं। उसके बाद टीकमगढ़ संसदीय क्षेत्र में सपा की कहीं भी मौजूदगी नहीं रही। यहा जरूर है कि सपा दूसरे और तीसरे नंबर पर अहसास कराती रहीं हैं। विधानसभा चुनावों में बसपा का प्रदर्शन इस क्षेत्र में भी सपा से नीचे ही रहा है। पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों को आधार मानते हुए बुन्देलखंड की इन दोनों सीटों को गठबंधन में सपा को सौंपा गया है। जानकारी है कि टीकमगढ़ सीट पर समाजवादी पार्टी ने रिटायर्ड डीएसपी रतिराम बंसल पर दांव अजमाया है। श्री बंसल भोपाल में टीआई भी रह चुके हैं। हाल के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने टीकमगढ़ की जतारा सीट पर भाग्य अजमाया था, लेकिन वह जीत तो नहीं पाये थे। कहा जा रहा है कि उनके विधानसभा चुनावों में प्रदर्शन को देखते हुए सपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाया है। हालांकि खजुराहो में अभी सपा ने अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है।

गठबंधन से यह समझा गया है फायदा

खजुराहो और टीकमगढ़ सीटों पर हुआ गठबंधन कई फायदे बता रहा है। बता दें कि टीकमगढ़ संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली बिजावर विधानसभा सीट पर हाल के चुनाव में सपा उम्मीदवार राजेश शुक्ला ने जीत हासिल की थी। इस चुनाव में शुक्ला को सपा से टिकट मिलने पर यादव और मुस्लिम जहां एकजुट हुए थे तो उन्हें जातीय ब्राह्मण वोटों का लाभ भी मिला था। हालांकि विधायक शुक्ला का परिवार आजादी के बाद से ही कांग्रेस से जुड़ा रहा है, पर उनके परिवार में किसी को भी बिजावर सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनावों में सफलता नहीं मिली है। राजेश दो बार पूर्व में यहां से चुनाव हारे हैं। गठबंधन के यही मायने हैं कि जहां सपा के पक्ष में यादव और मुस्लिम कहीं न कहीं एकजुट होंगे तो बसपा का दलित वोट बैंक भी सपा के लिए समर्थक की भूमिका में आगे आएगा।

टीकमगढ़ में दो बार सपा का प्रदर्शन

टीकमगढ़ संसदीय सीट पर पिछले दो चुनावों में अगर सपा का प्रदर्शन देखें तो उसके लिहाज से इस पार्टी को कमजोर आंकना भाजपा और कांग्रेस जैसे दलों की बड़ी भूल होगी। अब चूंकि गठबंधन है। इस कारण दलित वोट बैंक भी इस पार्टी के प्रत्याशी की ओर खिसकने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। बता दें कि 2014 के चुनाव में आरक्षित टीकमगढ़ लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी ने डा. अंबेश कुमार अहिरवार को मैदान में उतारा था। उन्होंने 47 हजार 497 वोट हासिल करते हुए अपनी ताकत तीसरे स्थान पर बरकरा रखी थी। जबकि बसपा यहां चौथे नंबर पर रही थी। यहां पर बसपा उम्मीदवार सेवक राम अहिरवार को 23 हजार 975 वोट हासिल हुए थे। जबकि 2009 के दौरान सपा ने यहां से ज्यादा वोट हासिल किए थे। इस चुनाव में टीकमगढ़ सीट से चिंतामन कोरी ने सपा की सवारी की थी। इस चुनाव में उन्होंने 80 हजार 625 वोट हासिल किए थे। बसपा उम्मीदवार जीडी को मात्र 35 हजार 993 वोट मिले थे।

खजुराहो में भी सपा-बसपा की दमदारी

पिछले दो चुनावों में खजुराहो संसदीय सीट पर भी सपा ने तीसरी ताकत का अहसास कराया है। 2014 के चुनाव में इस सीट पर दिवंगत पूर्व सांसद सुखलाल कुशवाहा के मौजूदा कांग्रेस विधायक पुत्र सिद्धार्थ कुशवाहा सपा से मैदान में थे। उन्होंने 60 हजार 368 वोट हथियाये थे। दूसरे नंबर पर रहते हुए भाजपा उम्मीदवार नागेन्द्र सिंह से पराजित हुए कांग्रेस प्रत्याशी राजा पटैरिया को 2 लाख 27 हजार 476 वोट प्राप्त हुए थे। 2014 में बसपा ने खजुराहो से अपना उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा था, लेकिन 2009 में उसका प्रदर्शन सपा से कहीं ज्यादा दमदार था। 2009 के चुनाव में बसपा उम्मीदवार सेवालाल पटेल को खजुराहो सीट पर 77 हजार 107 वोट हासिल हुए थे। जबकि सपा उम्मीदवार जयवंत सिंह को 20 हजार 45 वोट मिले थे।