यूनिसेफ को भाया सीनियर आईएएस का यह प्लान

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भोपाल|  अपने नवाचारों के लिए देश भर में पहचाने जाने वाले आईएएस उमाकांत उमराव का हिरण्यगर्भ अभियान प्लान यूनिसेफ को भा गया है। भोपाल स्थित यूनिसेफ के कार्यालय में हुए प्रेजेंटेशन में उमराव ने एक स्वस्थ और विकसित समाज व राष्ट्र के लिए जन्म लेने वाले बच्चे के साथ उसकी माता के शारीरिक एवं मानसिक तंदरूस्ती पर जोर दिया। जींस के अधिकारियों ने इस अभियान को बेहद सराहा और उन्होंने कहा कि इसका डॉक्यूमेंटेशन कराएंगे अन्य जगह पर इसे लागू करने पर गंभीरता से काम किया जाएगा। नर्मदापुरम संभाग के तत्कालीन कमिश्नर उमाकांत उमराव के नेतृत्व संभाग के जिलों में इस अभियान ने सफलता हासिल की है,  जिसके अच्छे परिणाम सामने आये हैं|  संभाग के हरदा, होशंगाबाद एवं बैतूल जिले में मातृ-मृत्य एवं शिशु-मृत्यु की दर में कमी आई है। आईएएस उमराव वर्तमान में मप्र ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण भोपाल में मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पद पर पदस्थ है।

क्या है अभियान 

इस अभियान के अंतर्गत लगातार मेडिकल ऑफिसर एवं उनकी पूरी टीम तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी की टीम हाईरिस्क गर्भवती महिला के घर पर जाकर महिला एवं उसके पति, ससुराल वालों, परिजनों को गर्भवती महिला के हाईरिस्क होने की जानकारी देते हैं। साथ ही महिला, उसके पति, सास ससुर को बताते हैं कि क्योंकि महिला हाईरिस्क की केटेगरी में है। अत: महिला की विशेष देखभाल की जाए। उसे पर्याप्त पोषण आहार दिया जाए, कोई भारी काम महिला से न कराया जाएं उसे पर्याप्त आराम करने दिया जाएं। चिकित्सकों एवं महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम गृहभेंट इसलिए करती है क्योंकि यदि हाईरिस्क महिला को समझाया भी जाएं कि उसे विशेष देखभाल एवं खानपान के सेवन की आवश्यकता है तो महिला संकोचवश अपने पति या सास ससुर से यह बात नहीं कह पाती है और गृहभेंट के दौरान अधिकारी गण महिला के परिजनों को अच्छी तरह यह बात समझा पाते हैं कि महिला को अभी विशेष देखरेख की जरूरत है। गृहभेंट के दौरान परिजनों के समक्ष ही महिला के स्वास्थ्य की जांच की जाती है। उसका वजन किया जाता है। बीपी-शुगर चेक किया जाता है, जीडीएम देखा जाता है। हिमोग्लोबिन की मात्रा का पता लगाया जाता है। 

हिरण्यगर्भा मातृ मुस्कान अभियान की प्रक्रिया सर्वप्रथम आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं एएनएम एवं आशा कार्यकर्ता द्वारा हाईरिस्क गर्भवती महिला को आंगनबाड़ीवार चिन्हित किया जाता है। फिर महिला का आंगनबाड़ी केन्द्र में पंजीयन किया जाता है। एएनएम एवं आगंनबाडी कार्यकर्ता द्वारा पर्यवेक्षक के माध्यम से परियोजना अधिकारी एवं ब्लाक मेडीकल आफिसर के पास हाईरिस्क गर्भवती महिला की सूची भेजी जाती है। हाईरिस्क गर्भवती महिला की ब्लाक लेवल मेडीकल आफिसर द्वार उसकी व्यक्तिगत प्रोफाईल तैयार की जाती है, जिसमें मोबाइल नम्बर, पैरामीटर हाईरिस्क का कारण, वैल्यू आदि का उल्लेख रहता है। परियोजना अधिकारी एवं बीएमओ गृहभेट कर परिजनों को समझाते हैं। साथ ही गर्भवती महिला के संबंध में किये गये कार्यो की प्रगति संयुक्त हस्ताक्षर से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं जिला कार्यकर्ता अधिकारी को प्रेषित करते हैं। 

कंट्रोल रूम से निगरानी 

तत्कालीन कमिश्नर उमाकांत उमराव ने संभाग स्तर पर प्रतिमाह के द्वितीय बुधवार को संभागीय समीक्षा करते थे| नर्मदापुरम संभाग कमिश्नर कार्यालय के कंट्रोल रूम नम्बर 07574-250262 से हाईरिस्क महिला से दूरभाष के माध्यम से संपर्क कर उससे जानकारी ली जाती थी कि चिकित्सकों द्वारा उसका चेकअप किया गया कि नहीं एवं महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने उसे पोषण आहार दिया कि नहीं इस बात की प्रतिदिन कंट्रोल रूम द्वारा समीक्षा की जाती है। इस अभियान से जिले के सभी अटल बाल पालकों को भी जोड़ा गया है। अटल बाल पालक महिला के परिजनों की काउन्सलिंग करते है। इस अभियान को और अधिक गति देने के लिए कमिश्नर के निर्देश पर हरदा, बैतूल, होशंगाबाद जिले में वाट्स एप ग्रुप बनाया गया है। गर्भवती महिला के हाईरिस्क होने के लक्षण गर्भवती महिला हाईरिस्क की श्रेणी में है और इसका पता स्वास्थ्य विभाग की टीम महिला में कुछ लक्षणों की जांच कर पता लगाते है। यदि महिला का पूर्व प्रसव ऑपरेशन द्वारा किया गया है तो उस हाईरिस्क की श्रेणी में माना जाता है। इसके अलावा यदि पूर्व प्रसव में महिला का अत्यधिक खून बहा हो, पूर्व में बच्चा यदि जन्मजात विकृति वाला पैदा हुआ है, पूर्व में गर्भपात व शिशु मृत पैदा हुआ हो, महिला का रक्तचाप उच्च व वजन 40 किग्रा से कम हो खून की कमी हो, हीमोग्लोबिन 8 ग्राम से कम हो, जुड़वा अथवा अधिक गर्भस्थ शिशु की संभावना हो, पेशाब में एल्बुमिन या शुगर हो, रक्त स्त्राव, लंबाई 145 सेमी. से कम है, उम्र 18 वर्ष से कम या 35 वर्ष से अधिक या शिशु पेट में उल्टा या टेडा हो, हृदय रोग से पीड़ित हो, शरीर में सूजन हो, बच्चे का पेट में न घूमना व साढ़े 8 माह से पहले प्रसव पीड़ा हो तो महिला हाई रिस्क की श्रेणी में आ जाती है। उपाय के तहत बार-बार हाईरिस्क गर्भवती महिला के घर जाकर स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास की टीम उन्हें समझाती है। महिला के परिजनों को बताया जाता है कि महिला को बार-बार थोड़ा-थोड़ा भोजन करने एवं भोजन में विविधता को बढ़ावा देने, गर्भवती को सबके साथ बैठकर भोजन कराने को लेकर सुझाव दिया जाता है। महिला को राजगिरा के लड्डू, मुंगफली की चिक्की, सुरजने की फली, पत्तियां, फल दिया जाए। गृहभेट से आए सकारात्मक नतीजे कमिश्नर के निर्देश पर जब स्वास्थ्य विभाग एवं महिला व बाल विकास विभाग की टीम हाईरिस्क गर्भवती महिला के घर पर जाती है तो केवल गर्भवती की सास अपितु ससुर, जेठ, देवर एवं अन्य परिवार के सदस्य तथा पड़ोसी महिलाओं में भी गर्भवती की देखरेख के प्रति उत्सुकता जागती है। नर्मदापुरम संभाग के तीनों जिलो हरदा, बैतूल व होशंगाबाद में हिरण्यगर्भा मातृ मुस्कान अभियान के उत्साहजनक नतीजे सामने आए हैं। अब तक इस अभियान के तहत सैकड़ों हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराकर उनकी एवं उनके शिशुओं की जान बचाई गई है।

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