पेड़ों की कटाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी, मानव श्रृंखला बनाकर पेड़ बचाने की अपील

Protested the felling of trees by forming a human chain : भोपाल में पीपल और बरगद के पेड़ को बचाने के लिए लोगों ने मानव श्रृंखला बनाई। इसी के साथ उन्होने और पर्यावरणविद उमाशंकर तिवारी ने चेतावनी दी कि अगर इन पेड़ों को काटा गया तो वो इसके खिलाफ हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे।

बागसेवनिया में विश्वकर्मा मंदिर के पीछे पीडब्ल्यूडी एक सड़क बना रहा है। उसी रास्ते में एक किनारे पर ये ऊंचे ऊंचे पेड़ लगे हुए हैं। रहवासियों ने इस विशाल पेड़ों को बचाने के लिए मानव श्रृंखला बनाई और मांग की कि इन पेड़ों को न काटा जाए। इस मौके पर पर्यावरणविद उमाशंकर तिवारी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने भी कहा है कि सड़क के बीच में अगर पेड़ आ रहा है तो सड़क तिरछी करके बनाई जा सकती है। यहां भी इस नियम का पालन किया जाए। इसी के साथ उन्होने कहा कि अगर यह पेड़ काटने का निर्णय लिया गया तो वो इसके खिलाफ हाई कोर्ट हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे।

पेड़ों की कटाई पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा है। पेड़ों की कटाई से कई पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभाव होते हैं। इस कारण पर्यावरणीय प्रभावों में वायुमंडलीय प्रदूषण, जल प्रदूषण, वन्यजीवों के नष्ट होने की संभावना होती है। लगातार प्राकृतिक संसाधनों के क्षय से धरती को बहुत नुकसान हो रहा है। पेड़ वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने, ऑक्सीजन उत्पन्न करने, मृदा धातुओं को संचित करने, जल संवर्धन सहित और भी कई महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पेड़ों की कटाई से हम इन सभी लाभों से वंचित हो सकते हैं और इसके परिणामस्वरूप पूरी पृथ्वी और मानव सभ्यता पर विपरीत असर हो सकता है।


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श्रुति कुशवाहा

श्रुति कुशवाहा

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि।

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