क्यू छोड़ी अरुण यादव ने दावेदारी, सारी तैयारी के बावजूद, फिर वजह क्या हुई !

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। खंडवा लोकसभा उपचुनाव के लिए दमदारी से ताल ठोकने वाले पूर्व मंत्री अरुण यादव ने अचानक ही सबको चौंका दिया, प्रबल दावेदार अरुण यादव ने दावेदारी छोड़ने की घोषणा कर दी। हालांकि अब भी सबकी नज़रे उनकी तरफ है, अरुण यादव ने यह फैसला आखिर क्यों लिया अभी भी यह सवाल बना हुआ है, उन्होंने खुद इसकी वजह पारिवारिक कारण बताया है लेकिन 24 घंटे पहले तक वह खुद को इस सीट के लिए प्रबल दावेदार बता रहे थे, फिर ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने दावेदारी छोड़ दी, जबकि खुद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह उन्हें शुभकामनाएं दे चुके थे और पिछले दो महीनों से अरुण यादव क्षेत्र में बेहद सक्रिय भी थे, हालांकि अरुण यादव ने दावेदारी छोड़ने के बाद साफ कहा कि पार्टी जिसे भी प्रत्याशी बनाएगी मैं उसकी मदद करूंगा। यह माना जाता है कि अरुण यादव और प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के सियासी रिश्ते मधुर नही है, अरुण यादव सार्वजनिक तौर पर भी कमलनाथ के खिलाफ बयानबाज़ी कर चुके हैं, लेकिन अरुण यादव की खंडवा सीट की दावेदारी को लेकर कमलनाथ ने कहा था कि फिलहाल तय नही है कि कौन चुनाव लड़ेगा।

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वही अब दूसरी तरफ सोमवार को बी जे पी प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा के बयान ने भी और संशय की स्थिति बना दी है, वी डी शर्मा ने कहा हमारे विचार, नीति सिद्धंत से कोई सहमत होकर बीजेपी में आता हैं। उनको लगता है कि देश सेवा कर सकते हैं, तो ऐसे सभी लोगों का स्वागत है। हालांकि इस बयान से कयास नही लगाया जा सकता है कि अरुण यादव बी जे पी में आ सकते है क्योंकि कुछ दिन पहले ही ट्वीट कर लिखा था कि मैं यादव हूं सिंधिया नही, रक्त की एक एक बूंद में कांग्रेस की विचारधारा है।

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फिलहाल अब राजनीति के जानकारों की माने तो अरुण यादव, राहुल गांधी के करीबी नेताओं में से एक है। लेकिन प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ का पार्टी में अपना रुतबा है। उनके किसी भी फैसले को बदलना राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए आसान नहीं होता है। ऐसे में यादव का बैकफुट पर आना स्वभाविक है, अब खंडवा से अरुण यादव की जगह किसे मैदान में उतारा जाएगा। कांग्रेस के लिए भी यह पशोपेश भरा सवाल है। कांग्रेस भी जानती है कि क्षेत्रीय नेताओं में उनके अलावा कोई बड़ा चेहरा नहीं है, जो बीजेपी को इस सीट पर टक्कर दे सके।