Burhanpur news: हत्याकाण्ड के खुलासे में परिजन हुए बेनकाब, 15 दिनों में पुलिस ने सुलझाई गुत्थी

माता-पिता और बहन ने ही मिलकर ठिकाने लगाई लाश। लाश पर बंदी घर की रस्सी से सुलझी गुत्थी।

बुरहानपुर, शेख रईस। मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्र में नये साल के दुसरे दिन हुए हत्याकांड की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है।  इस कांड के पीछे मृतक के परिजनों का हाथ निकला। आपको बता दें कि रात्री 10.00 बजे रामकृष्ण पिता भिमानसिंग उम्र 25 वर्ष जाति भिलाला निवासी ग्राम धुलकोट के घर से गुमशुदा हो जाने की जानकारी पुलिस को दी गई थी। पुलिस ने गुमशुदगी का मामला क्रमांक 01/22 के रूप में दर्ज कर जांच शुरू कर दी। इसके 3 दिन बाद 5 तारीख को रूपा रेल नदी फारेस्ट रेस्ट हाउस के पीछे गुमशुदा लाश मिलने की सूचना पुलिस को मिली। लाश की शिनाख्त रामकृष्ण के रूप में हुई।

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जांच के दौरान पुलिस ने दोनों मामलों को आपस में जोड़ते हुए पाया की किसी अज्ञात बदमाश ने रामकृष्ण की हत्या कर दी है और लाश छुपाने की नियत से हाथ पैर बांध कर रूपारेल नदी मे फैक दिया। थाना निम्बोला के अंतर्गत अपराध क्र 17/22 धारा 302,201 भादवि के तहत दर्ज किया गया और फिर पुलिस जांच में जुटी। विभिन्न मोबाइल फोंन के टावर लोकेशन की जांच की जाने लगी। इस बीच यह जानकारी मिली की मृतक के परिवार मे भी कोई विवाद था। पुलिस ने इस कड़ी को अपनी जांच का मुख्य मुद्दा बनाकर जांच आगे बढ़ाई और मृतक के परिजनों पर संदेह होने पर पिता भिमानसिंग, माँ  जमनाबाई, बहन कृष्णाबाई  से सख्ती से पुछताछ की।

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पुलिस को पता चला कि मृतक रामकृष्ण की सगाई हो गयी थी और वह किसी अन्य लडकी से बात करता था और कोई कामधंधा नही करता था जिससे परिजन नाराज थे। घटना वाले दिन भी जब वह किसी लड़की से बात कर रहा था तो उसके पिताजी नाराज हो गए और उन्होंने उसे दो थप्पड़ जड़ते हुए दीवार में धक्का दे दिया। दीवार पर से टकराने के बाद वह नीचे गिर गया और ऐसे ही पड़ा रहा। बाद में जब परिजनों ने देखा तो उसकी मौत हो चुकी थी। मृतक के पिता भिमानसिंग ने इसके बाद उसकी लाश ठिकाने के लगाने के लिए मृतक मां की मदद भी ली। मृतक की मां जमनाबाई पति भिमानसिंग चौहान उम्र 45 वर्ष, बहन कृष्षा बाई पिता भिमान सिंग उम्र 26 वर्ष  की ने मिलकर लाश को रूपरेल नदी मे फैक दिया । पुलिस ने जब मृतक के हाथ पैरों पर उसके घर की ही  रस्सी को पाया तो घर वालों से सख्ती से पूछताछ की और उन्होंने जल्दी अपना जुर्म कबूल कर लिया।

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पुलिस अधीक्षक, अति. पुलिस अधीक्षक संखाराम सेंगर, एस.डी.ओ.पी यशपाल सिंह, थाना प्रभारी उनि हंसकुमार झिझौरे, कार्य उनि सुनिल पाटिल चौकी प्रभारी धुलकोट , सउनि राजेश पाटील, प्र.आर भरत देशमुख, प्र.आर जितेन्द्र रावत, प्र.आर कोमलवर्मा, प्र.आर.गणेश पाटील, आरक्षक मनोज, प्रताप, विनोद, हल्केराम, आर. दुगैश, आर.सतीश सूर्यवंशी म.आर. 547 पूजा सावनेर ने इस मामले को मिलकर 15 दिनों में ही सुलझा दिया।