इस स्कूल में बच्चों के भविष्य से हो रहा खिलवाड़, टीचर्स और स्टाफ की मनमानी से बच्चे परेशान, जानें मामला

कोरोना काल मे बच्चों की पढ़ाई चौपट हो गई थी। वहीं अब सेवढा के सरकारी स्कूल में स्टाफ की मनमानी चल रही है। यहां स्कूल स्टाफ की मनमानी के चलते टीचर्स औ स्टाफ समय पर स्कूल नहीं पहुंचते हैं और न ही समय पर क्लास लगाई जा रही है।

सेवढा, राहुल ठाकुर। सेवढा अनुभाग अंतर्गत सेवढा नगर स्थित एक मात्र सरकारी स्कूल उत्कृष्ट हायर सेकंडी स्कूल में प्राचार्य समेत अन्य स्टाफ के उदासीनता के चलते दिन-प्रतिदिन छात्रों के भविष्य को चौपट करने में तुला हुआ है। यहां बच्चों को पढ़ाई से सम्बंधित किसी भी सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा है। हम बात कर रहे है प्राचार्य एम पी गुप्ता की जो आये दिन विवादों में घिरे रहते है। स्कूल के प्राचार्य कभी भी उपस्थिति दिनांक से मुख्यालय पर नहीं रुके हैं। वे अपने ग्रह निवास लहार से अप डाउन करते है जिसके चलते न तो वे समय पर किसी स्टाफ को रुकने का आदेश दे पात हैं और न ही रेगुलर क्लास लगाने के लिए क्लास टीचर से कह पाते हैं।

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इस मामले पर जब एमपी ब्रेकिंग की टीम उक्त स्कूल परिसर में पहुँची तो देखने में आया कि कुछ स्टाफ समय पर ऑफिस के बाहर कुर्सी डाले हुए बैठे थे, तो कुछ स्कूल आये हीं नहीं थे। ऐसे में जब एक बच्चे से स्कूल खुलने का समय पूछा गया तो वो इसका एक तय समय नहीं बता पाया और न ही क्लास में लगने वाले विषय शिक्षक की क्लास के बारे में कुछ कह पाया। वह हिचकिचाहट भरे बोल बोलता रहा लेकिन छात्र को टाइम टेबल के बारे में जानकारी हीं नहीं थी। यहां दोपहर करीब साढ़े 12 बजे तक बच्चे यहां से वहां भटकते-घूमते नज़र आए, तो कुछ बच्चे क्लास रूम के बाहर क्लास का ताला खुलने का इतंजार करते व टेबल पर बैठे नजर आए।

इस स्कूल में बच्चों के भविष्य से हो रहा खिलवाड़, टीचर्स और स्टाफ की मनमानी से बच्चे परेशान, जानें मामला

स्टाफ रहता है नदारद

सेवढा उत्कृष्ट स्कूल की बात करे तो यहां प्राचार्य एम पी गुप्ता समेत अन्य स्टाफ समय पर नहीं आते हैं। यहां का स्टाफ स्कूल खुलने के दो घण्टे के बाद तक आता है। ऐसे में स्कूल में दर्ज करीब 830 बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और समय पर उनकी पढ़ाई को लेकर कोई स्टाफ की नजर अपने कर्तव्यों को लेकर नहीं दिखाई देती। वही स्कूल बंद होने से पहले ही स्टाफ नौ-दो गयारह हो जाते हैं। स्टाफ की मनमानी इतनी है कि वह अपनी मन के मालिक रहते है जिन्हें शिक्षा विभाग के किसी भी अफसर का भय नही रह है।

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