गन्ना काश्तकारों के साथ गुड क्रेशर संचालक गन्ना खरीदी में कर रहे हैं मनमानी

दतिया। सत्येन्द्र रावत।

जिले के गोराघाट क्षेत्र में किसानों द्वारा गन्ने की पैदावार सबसे अधिक की जाती है लेकिन पिछले कई वर्षों से गन्ने के उचित दाम ना मिलने से गन्ने के रकबे में कमी आई है। जिसके चलते कोलू मालिकों की चांदी कट रही है क्षेत्र में शक्कर मिल संचालित ना होने से गन्ने को औने पौने दामों पर खरीद कर बाहर से आए गुड़ क्रेशर संचालक अच्छी खासी कमाई करके ले जाते हैं। जिसके चलते पिछले 5 वर्षों में गन्ने के रकबे में 70% तक की कमी आई है।

जिले में गन्ने के घटते रकबे का मुख्य कारण चीनी मिल ना होने के कारण ऐसा हुआ है वही पिछले 10 साल से बंद पड़ी द ग्वालियर शुगर कंपनी लिमिटेड डबरा की सुध न तो सरकार ने ली और ना ही शुगर मिल के मालिक ने जिसके चलते किसानों का आज भी करोड़ों रुपए शुगर फैक्ट्री पर बकाया है..। इसके अलावा दतिया के सेवड़ा क्षेत्र मैं 2 वर्ष पहले संचालित हुई शुगर फैक्ट्री आज भी चलने की स्थिति में नहीं है इसके अलावा दतिया जिले के बडौनी क्षेत्र नई शुगर फैक्ट्री की स्वीकृति जिला प्रशासन द्वारा दी गई थी लेकिन वह भी आज दिनांक तक शुरू नहीं हो सकी जिसके चलते किसान गन्ने की उपज गुड क्रेशर संचालकों को बेचने के लिए मजबूर हो रहा है उसके गन्ने को औने पौने दामों पर खरीद कर किसानों की खून पसीने की कमाई का लाभ उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरपुर जिले से आए व्यापारियों मिल रहा है..।

जिला प्रशासन द्वारा आज दिनांक तक भी गुड़ क्रेशर संचालकों के पंजीयन कमर्शियल नहीं किए जिले में एक भी किसान स्वयं गुड क्रेशर संचालित नहीं कर रहा है सभी उत्तर प्रदेश निवासी दतिया शिवपुरी और ग्वालियर गुड़ के कोल्हू लगाकर किसानों को लूटने का कार्य कर रहे हैं इन लोगों की पुलिस थानों में भी इंट्री नहीं है जिसके चलते कई बार गंभीर अपराध भी देखने को मिलते हैं सबसे अधिक गुण क्रेशर दतिया जिले के गोराघाट क्षेत्र में लगे हुए हैं जिनकी संख्या लगभग 100 से अधिक है जिले के मजदूरों को मजदूरी करने के लिए दर-दर भटकना पड़ता है जबकि बाहर के लोग गुड़ क्रेशर मजदूरी कर रहे हैं इन मजदूरों का नाही तो क्रेशर मालिक द्वारा बीमा कराया गया है और ना ही सुरक्षा के कोई विशेष इंतजाम किए गए जिससे कभी भी हादसे होने की आशंका बनी रहती है.।