उपचुनाव से पहले बागली में फिर सुलगा जिले का मुद्दा, मतदान के बहिष्कार की दी चेतावनी !

युवाओं ने आक्रोशित स्वर में बागली क्षेत्र में राजनीतिक कार्यक्रमों के बहिष्कार की भी चेतावनी दी है। यही नहीं प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात कर क्षेत्र के हित मे सहयोग की अपील की है।

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बागली, सोमेश उपाध्याय। लोकसभा उपचुनाव (Lok Sabha by-election) के पूर्व देवास जिले (Dewas District) के बागली (Bagli) में एक बार फिर बागली को जिला बनाने का बहुप्रतीक्षित मुद्दा सुलग उठा है। जहां स्थानीय युवाओं ने रैली निकाल कर नगर के प्रमुख चौराहे पर “जिला नहीं तो वोट नहीं व नेताओं के प्रवेश निषेध” के पोस्टर चस्पा कर दिए है। युवाओं ने आक्रोशित स्वर में बागली क्षेत्र में राजनीतिक कार्यक्रमों के बहिष्कार की भी चेतावनी दी है। यही नहीं प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात कर क्षेत्र के हित मे सहयोग की अपील की है।

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कांग्रेस और भाजपा के नेता साथ
रैली में बागली नगर अध्यक्ष अमोल राठौर, भाजपा नेता सूर्यप्रकाश गुप्ता, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेन्द्र कुमार ईनाणी, कमल सोनी, जिला उपाध्यक्ष श्यामा तोमर ने भी सहभागिता की। नपाध्यक्ष राठौर ने कहा कि बागली जिला माँग नहीं बल्कि क्षेत्र का स्वाभिमान व हमारे नेता स्व.कैलाश जी की प्रतिष्ठा का सवाल है। जब मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से जिले घोषणा की है तो उस पर क्रियान्वयन जरूरी है। संगठन को अवगत कराएंगे और जब तक माँग पूरी नही होती है क्षेत्र की जनता के साथ खड़े हो कर राजनीतिक कार्यक्रमों से दूरी बनाएंगे। सभी युवा भाजपा नेता मोतीलाल पटेल, कमल यादव, देवेंद्रगिरि गोस्वामी, डॉ रामचन्द्र राठौर, राजेश बजाज के निवास पर भी पहुँचे व सहयोग की अपील की। गोपी शर्मा ने कहा कि यदि उपचुनाव के पूर्व बागली जिले की प्रशासनिक स्वीकृति नही मिलती है तो आन्दोल उग्र किया जाएगा। वहीं बागली जिला बनाओ अभियान समिति के एडवोकेट मुकेश कुमार गुर्जर ने कहा कि प्रदेश की मुखिया की घोषणा के एक वर्ष बाद तक जिला नही बनना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह न केवल क्षेत्र का बल्कि राजनीति के सन्त स्वर्गीय कैलाश जोशी जी का भी अपमान है। उपचुनाव के पूर्व जिले की स्वीकृति नही मिलने पर मतदान का बहिष्कार के साथ झूठे नेताओं के विरुद्ध मोर्चा भी खोला जाएगा।

सीएम कर चुके है घोषणा, क्रियान्वयन का इंतजार
बागली को जिला बनाने की माँग लम्बे अरसे से की जा रही है। बागली को जिला बनाना सियासत के सन्त कहे जाने वाले मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम स्व.कैलाश जोशी की अंतिम इच्छा थी। जिसे पूरी करने के लिए सीएम शिवराज सिंह चौहान ने चुनावो के दौरान दो बार वादा किया था। वहीं स्व.कैलाशजोशी के प्रथम पुण्यस्मरण के दौरान अधिकारीक रूप से बागली जिले की घोषणा करि थी। परन्तु घोषणा के एक वर्ष बाद भी क्रियान्वयन शुरू नही होने के कारण क्षेत्रीय लोगों में आक्रोश उपजने लगा है।

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पहली बार भाजपा नेताओं में दिखा आक्रोश
बागली आरम्भ से ही जनसंघ व भाजपा की मजबूत सीट रही है।इंदिरा व राजीव लहर में भी बागली नही डिगी। केवल सन 1998 के चुनाव को छोड़ दिया जाए तो सन 1962 से लेकर आज तक यहां से भाजपा का ही छत्रप रहा है।आदिवासी बाहुल्य होने के कारण बागली विकास से पिछड़ गया। जिले की घोषणा के बाद यहां विकास की उम्मीद जगी थी,परन्तु घोषणा पूरी न होने के कारण भाजपा कार्यकर्ताओं में भी अपनी ही पार्टी के प्रति आक्रोश दिखाई दे रहा है। वहीं नर्मदा-सिंचाई योजना के चलते समीप के ग्रामीण क्षेत्रो में पहले से ही आन्दोलन जारी है। यदि यह दोनों बहुप्रतीक्षित माँग खंडवा लोकसभा उपचुनाव के पूर्व पुरी नही होती है,तो इसका प्रभाव चुनावों में देखने को मिलेगा।

पूर्व मंत्री दीपक जोशी ने कहा कि बागली मेरा परिवार है। यहां की जनता की हर मांग के साथ मे हमेशा खड़ा रहूंगा।बागली को जिला बनाने की घोषणा की जा चुकी है।कोरोना काल के कारण प्रशासनिक लेट-लतीफी हुई है।अभी प्रदेश में बाढ़ की समस्याओं के चलते सीएम से मुलाक़ात नही हो पाई।शिघ्र मुलाकात कर मुख्यमंत्री जी से चर्चा करूँगा।बागली को हर हाल में जिला बनाया जाएगा।

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