अग्निकांड: जांबाज युवक का निगम ने किया सम्मान, नौकरी का ऑफर मिलने पर कहा-‘जहां हूं वहीं ठीक हूं’

134

ग्वालियर। अतुल सक्सेना| Gwalior News शहर के गोयल परिवार के साथ हुए हादसे को शहरवासी चार दिन बाद भी भुला नहीं पाया है लेकिन एक बात और है जिसकी चर्चा भी शहर में थमी नहीं है वो है एक युवक की जांबाजी, जिसने अपनी जान की परवाह किये बिना आग में छलांग लगा दी। उसने बिना किसी संसाधन के लपटों के बीच से एक मासूम को जिंदा बचा लिया। नगर निगम ने गुरुवार को इस युवक का सम्मान किया और अपने यहाँ आउट सोर्स कर्मचारी के रूप में नौकरी का ऑफर दिया। हालांकि युवक ने ऑफर ठुकरा दिया और कहा कि मैं जहाँ हूँ वहीं ठीक हूँ।

हम जिस जांबाज युवक की बात कर रहे हैं उसका नाम है महेश बाथम। चार दिन पहले तक महेश बाथम की पहचान एक सीमेंट की दुकान पर काम करने वाले ड्रायवर के रूप में थी। लेकिन सोमवार को गोयल पेंट हाउस में लगी भीषण आग में जिस तरह से महेश ने दिलेरी दिखाई और अपनी जान की बाजी लगाकर आग की लपटों में बिना कुछ सोचे समझे कूद गया उसने ना सिर्फ आग बुझाने में बड़ी भूमिका निभाई बल्कि एक मासूम गौरवी को भी आग की लपटों में से जिंदा खींच लाया। उसके इसी साहस ने उसे सामान्य से खास बना दिया। हालांकि इस हादसे में गोयल परिवार के सात सदस्यों की जान चली गई। जिनमें तीन मासूम और चार महिलाएं शामिल हैं। गुरुवार को नगर निगम आयुक्त संदीप माकिन ने बाल भवन नगर निगम कार्यालय में महेश बाथम का शॉल, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र और 5100 रुपये राशि देकर सम्मानित किया। आयुक्त ने इस मौके पर महेश को आउट सोर्स कर्मचारी के रूप में निगम में नौकरी करने का ऑफर भी दिया । निगम आयुक्त ने कहा कि महेश ने जिस जांबाजी से आग में घुसकर बच्ची की जान बचाई वो सच में साहस का काम है और हम उनके साहस को सलाम करते है, निगम ऐसे साहसी व्यक्ति को अपने यहाँ नौकरी ऑफर कर रहा है।

उधर महेश बाथम ने अपने सम्मान के लिए आभार जताया। अग्निकांड को याद करते हुए बताया कि पहले मुझे भी डर लगा। लेकिन मैंने हिम्मत कर अंदर घुसने की ठान ली। पहले मैं दो बच्चों को निकाल कर लाया लेकिन तब तक उनकी मौत हो गई थी। फिर एक बच्ची की आवाज आई। अंदर घुसने का प्रयास किया तो महिलाओं के शव दरवाजे पर थे वो खुल नहीं रहा था। तो शवों को एक तरफ किया फिर आवाज की दिशा में भागकर बच्ची गौरवी को बचाकर निकाला। इस दौरान डर भी लगा कि कहीं आग में मैं ना घिर जाऊँ लेकिन बच्ची की चीख के सामने मैं सब कुछ भूल गया। महेश ने नगर नगर द्वारा नौकरी ऑफर करने पर धन्यवाद देते हुए इसे स्वीकार करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि ठेकेदार के अंडर में 7000-8000 की नौकरी की बात कह रहे हैं। इतना तो मुझे अभी वेतन ही मिलता हूँ। मैं जहाँ हूँ वहीं ठीक हूँ। पेशे से ड्राइवर एक सीमेंट की दुकान की गाड़ी चलाते हैं और उस परिवार से तीस साल से जुड़े हैं उन्होंने उस परिवार को छोड़ने से मना कर दिया।

गौरतलब है कि महेश बाथम के साहस को सलाम करते हुए घटना के अगले दिन मंगलवार को पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल ने 5000 और कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने सम्मान स्वरूप 10000 रुपये महेश बाथम को भेंट किये हैं। वहीं मप्र चैंबर ऑफ कॉमर्स ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया , केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, सांसद विवेक शेजवलकर सहित अन्य जन प्रतिनिधियों को पत्र लिखकर महेश को सम्मानित करने और उसे आर्थिक सहायता देने की मांग की है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here