दादी और पिता की राह पर चल निकले सिंधिया

ज्योतिरादित्य सिंधिया

अतुल सक्सेना/ग्वालियर। कांग्रेस के बड़े नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में शामिल होने जा रहे है। घटनाक्रम को देखकर कहा जा सकता है कि अब सिर्फ घोषणा होना औपचारिक है। यानि ज्योतिरादित्य सिंधिया भी अपनी दादी राजमाता विजया राजे सिंधिया और पिता माधव राव सिंधिया की राह पर चल पड़े हैं।

कांग्रेस द्वारा सिंधिया परिवार की उपेक्षा का ये पहला मामला नहीं है । 53 साल पहले 1967 में जब मध्यप्रदेश में डीपी मिश्रा कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री थे। तब राजमाता विजया राजे सिंधिया की पार्टी में उपेक्षा की गई थी जिससे नाराज हिकार उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी और वे जनसंघ से जुड़ गई थी। और फिर जनसंघ के टिकट पर गुण लोकसभा सीट से चुनाव भी जीती थी। इसके अलावा उनके पिता माधव राव सिंधिया ने भी पार्टी की उपेक्षा से नाराज होकर 1993 में दिग्विजय सिंह के शासन काल में पार्टी को छोड़ दिया था। और अपनी अलग पार्टी मप्र विकास कांग्रेस बना ली थी। हालांकि बाद में वे वापस कांग्रेस में आ गए थे।

कांग्रेस द्वारा सिंधिया परिवार की उपेक्षा का ये पहला मामला नहीं है । 53 साल पहले 1967 में जब मध्यप्रदेश में डीपी मिश्रा कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री थे। तब राजमाता विजया राजे सिंधिया की पार्टी में उपेक्षा की गई थी जिससे नाराज हिकार उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी और वे जनसंघ से जुड़ गई थी। और फिर जनसंघ के टिकट पर गुण लोकसभा सीट से चुनाव भी जीती थी। इसके अलावा उनके पिता माधव राव सिंधिया ने भी पार्टी की उपेक्षा से नाराज होकर 1993 में दिग्विजय सिंह के शासन काल में पार्टी को छोड़ दिया था। और अपनी अलग पार्टी मप्र विकास कांग्रेस बना ली थी। हालांकि बाद में वे वापस कांग्रेस में आ गए थे।