Hospital में करवाया इलाज, पैसे देने के नाम पर चोरी छिपे पिछले गेट से हुए फरार, मामला दर्ज

जबलपुर (Jabalpur) में जहाँ एक मरीज के परिजनों ने पहले तो ईलाज करवाया और फिर ईलाज के पैसे न देने पड़े तो चोरी-छिपे पीछे वाले गेट से भाग निकले।

जबलपुर, संदीप कुमार। “एक तो चोरी ऊपर से सीना जोरी” कुछ इस तरह की घटना हुई है जबलपुर (Jabalpur) में जहाँ एक मरीज के परिजनों ने पहले तो ईलाज करवाया और फिर ईलाज के पैसे न देने पड़े तो चोरी-छिपे पीछे वाले गेट से भाग निकले। जैसे ही ये खबर अस्पताल प्रबंधन को लगी तो उन्होंने अस्पताल (Hospital) के पास भगाते हुए मरीज और उनके परिजनों को पकड़ा। इस दौरान विवाद हुआ और फिर पुलिस मौके पर आई,जिसके बाद मजबूरन दवाबवश अस्पताल प्रबधंन को बिना पैसे लिए ही मरीज को छोड़ना पड़ा।

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क्या है पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक दमोह जिला (Damoh District) के पथरिया में एक युवक क्रेशर में फसल की कटाई कर रहा था। उसी दौरान उसका हाथ चपेट में आ गया और कट गया,आनन-फानन में परिजन पथरिया स्वास्थ्य केंद्र (Patharia Health Center) और फिर उसके बाद दमोह जिला अस्पताल (Damoh District Hospital) पहुँचे। जहाँ से उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, परिजन युवक को लेकर मेडिकल कॉलेज ईलाज के लिए पहुँचते है उसी दौरान मेडिकल कॉलेज में एक युवक से उनका संपर्क होता है जो कि उन्हें आश्वाशन देता है कि कम से कम ईलाज में उसका अच्छी अस्पताल में ईलाज हो जाएगा। जिसके बाद युवक की बातों में आए परिजन सर्वोदय अस्पताल पहुंच गए। मेडिकल कॉलेज में जिस युवक से मरीज के परिजनों का संपर्क होता है उसकी बातों में आकर परिजन सर्वोदय अस्पताल पहुँचते है। जहाँ हाथ के इलाज के लिए प्रबधंन एक लाख रु का खर्चा बताता है। बाद में परिजन 70 हजार रु देने को तैयार हो जाते है और 20 हजार रु देकर इलाज शुरू किया जाता है। परिजन ने इस आधार पर ईलाज करवाया था कि युवक का कटा हाथ जोड़ दिया जाएगा पर हाथ नही जोड़ा गया। जिसके बाद परिजनों ने कहा की हम और रु नही दे सकते, इतना कहते हुए थोड़ी देर बाद परिजन बिना बताए मरीज को लेते हैं और चुपचाप अस्पताल से बाहर निकल आते है। जैसे ही ये जानकारी अस्पताल प्रबंधन को लगती है तुरन्त वो लोग मरीज के परिजनों को पकड़कर अस्पताल लेकर आते है जहाँ परिजन और अस्पताल प्रबंधन के बीच मारपीट हो जाती है।

सूचना पर अस्पताल पहुँची पुलिस
सर्वोदय अस्पताल (Sarvoday Hospital) में प्रबधंन और मरीज के परिजनों का विवाद इतना बढ़ गया कि पुलिस को इसमें हस्तछेप करना पड़ा। सूचना जैसे ही ओमती पुलिस को मिली वह मौके पर पहुंची, जहाँ दोनो पक्ष एक दूसरे की शिकायत करते है, परिजनों का कहना था कि अस्पताल प्रबंधन ने मारपीट की है वही प्रबधंन ने भी परिजनों के खिलाफ मारपीट की शिकायत दर्ज करवाई है।

ईलाज करने से पहले बता दिया था खर्चा : अस्पताल प्रबधंन
इधर सर्वोदय अस्पताल के डायरेक्टर का कहना है कि मरीज जिस समय आया था उसकी हालत बहुत नाजुक दी और हाथ से खून भी बह रहा था मरीज के ऑपरेशन का खर्चा करीब 70 हजार रु बताया गया था पर परिजन अपनी माली हालत खराब बताकर 40 हजार रु देने को कह रहे थे। जिस पर से की अस्पताल प्रबधंन तैयार हो गया, और उनसे 20 हजार रु नगद जमा करवाए गए पर जब मरीज ठीक हो गया तो बाकी की रकम दिए बिना ही चले गए जिस पर से उन्हें पकड़ा गया था।

वही एक बड़ा सवाल यह भी खड़ा होता है कि मेडिकल कॉलेज में कौन युवक था जिसने मरीज से संपर्क किया था। दमोह-पथरिया से जबलपुर मेडिकल कॉलेज ईलाज करवाने पहुँचे मरीज के परिजनों से किस युवक ने संपर्क किया और फिर उसे निजी अस्पताल में लेकर आया था ये अभी भी रहस्य बना हुआ है, कयास लगाए जा रहे है कि कही ऐसा तो नही कोई गैंग सक्रिय है जो कि सरकारी अस्पताल में जाने वाले मरीजो को कम पैसे में अच्छा ईलाज का प्रलोभन देकर लाते हो, बहरहाल पुलिस अब सभी एंगल से जाँच करने में जुटी हुई है।

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