सत्तन की चुनौती, ताई को टिकट दिया तो निर्दलीय लडूंगा चुनाव

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इंदौर| भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ में लोकसभा चुनाव से पहले दावेदारों के बीच खींचतान बढ़ गई है| एक तरफ तीन दशक से सांसद व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने यह कहते हुए अपनी दावेदारी पेश की है कि अभी इंदौर की चाबी उनके ही पास है| अब भाजपा के वरिष्ठ नेता राष्ट्रीय कवि सत्य���ारायण सत्तन की चुनौती ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी है| सत्तन द्वारा यह घोषणा की गई है कि इस बार के लोकसभा चुनाव में यदि भाजपा ने सुमित्रा महाजन को फिर से टिकट दिया तो उनके सामने वे निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ेंगे। उनकी इस घोषणा के बाद से भाजपा में चिंता की लकीरें देखी जा रही है। 

नाराज चल रहे भाजपा नेता सत्यनारायण सत्तन से मिलने लोकसभा स्पीकर और इंदौर की सांसद सुमित्रा महाजन सोमवार शाम अचानक उनके घर पहुँची थी। इस दौरान करीब 30 मिनिट दोनो के बीच बंद कमरे में चर्चा हुई है । चर्चा क्या हुई इस बात की भी चर्चा शहर भर में रही| इस बीच ताई से मुलाकात के अगले ही दिन मंगलवार को सत्तन ने ऐलान कर दिया कि पार्टी ने ताई को टिकट दिया तो वे निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। नगर अध्यक्ष गोपीकृष्ण नेमा को फोन कर उम्मीदवारों की सूची में खुद का नाम भी लिखने के लिए कहूंगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मैं संगठन को नुकसान नहीं पहुंचाऊंगा। ताई के अलावा कैलाश विजयवर्गीय, रमेश मेंदोला, मालिनी गौड़ और उषा ठाकुर भी सांसद के लिए बेहतर उम्मीदवार हैं। हम लोगों ने ताई को बहन के रूप में बड़ा सम्मान दिया है, अब उन्हें आई (मां) की भूमिका में आना होगा। वहीं सत्तन के निर्दलीय चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद सुमित्रा महाजन ने कहा कि अभी किसी को टिकट नहीं मिला है, वहीं सत्तन को मनाने की कोशिश भी जारी है, खबर है कि बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद प्रभात झा ने उन्हें मनाने की कोशिश की है| 

ऑफर है, लेकिन भाजपा को छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा

सत्तन ने अपनी निवास पर पत्रकारों से चर्चा की और यह ऐलान किया| उन्होंने कहा सोमवार रात सांसद मेरे निवास पर आई थीं। हमने मेरी पुस्तक और आने वाली कुछ पुस्तकों पर चर्चा की है जिसमें राम चरितमानस के एक पात्र सुशेन पर किताब लिखने का प्रयास चल रहा है। उन्होंने मुझसे चुनाव और पूर्व में दिए बयान पर कोई चर्चा नहीं की। जाते-जाते ताई से संगठन को लेकर बात हुई है। मैंने कहा कि तीन राज्यों में कार्यकर्ताओं की उदासीनता के कारण हमें हारना पड़ा। इसको लेकर पार्टी को सजग होना चाहिए। विधायकों को जो मंडल और क्षेत्र में नियुक्त करने के अधिकार हैं वे वापस लेकर संगठन को देना चाहिए। सत्तन ने बताया कि मुझे कई पार्टियों से ऑफर हैं। पिछले दिनों प्रवीण तोगड़िया, हाजी मस्तान और अरुण गवली की पार्टी से भी ऑफर आया था। मुझे प्रदेश अध्यक्ष भी बना रहे थे लेकिन मैं भाजपा को छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा।

 

ताई की राह आसान नहीं 

इंदौर से 8 बार लगातार जीतने का रिकार्ड कायम करने वाली ताई सुमित्रा महाजन की राह आसान नजर नहीं आ रही है। इंदौर भाजपा की मजबूत सीट है, कांग्रेस भी यहां दमदार उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है| इस बीच इस भाजपा में भी इस सीट से इस बार चेहरा बदलने की मांग की जा रही है| इसमें सबसे शीर्ष पर नाम कैलाश विजयवर्गीय का चल रहा है। वही दूसरा रोड़ा उनकी राह में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठतम नेता राष्ट्रीय कवि सत्यनारायण सत्तन हो गए हैं जिन्होंने खुलकर उनकी खिलाफत शुरू कर दी है। 

1989 से जीतती आ रही है ताई 

इंदौर सीट भाजपा का गढ़ है| 1989 में सुमित्रा महाजन ने यहां से पहला चुनाव लड़ा और फिर क्या था उसके बाद से तो यह सीट उन्हीं की हो गई| 1989 से लगातार वो यहां से सांसद हैं| 2014 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के सत्यनारायण पटेल को 4 लाख से ज्यादा वोटों से हराया था| सुमित्रा महाजन ने 1989 के चुनाव में कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश चंद्र सेठी को हराया| बता दें सुमित्रा महाजन इससे पहले इंदौर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से लगातार तीन विधानसभा चुनाव हार चुकी थीं| कांग्रेस ने उनको हराने की हर कोशिश की, लेकिन उसकी सारी कोशिश नाकाम ही साबित हुई| ताई के नाम से मशहूर सुमित्रा महाजन 8 बार से इंदौर की सांसद हैं| सुमित्रा इससे पहले 1982-85 में इंदौर महापालिका में पार्षद रह चुकीं हैं| 

 

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