Indore News: वैक्सीन के दूसरे डोज के बाद भी हुआ कोरोना, तो उनकी होगी जीनोम सिक्वेंसिंग

इंदौर में 20 से ज्यादा ऐसे केस सामने आए हैं जिनमें लोगों को कोविड वैक्सीन की दूसरी डोज लगने के बाद भी संक्रमण हो गया। स्वाथ्य विभाग द्वारा ऐसे संक्रमितों के सेंपल लेकर उनकी जीनोम सिक्वेंसिंग जांच के लिए पुणे भेजा जाएगा।

इंदौर, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में कोरोना (Covid 19) मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। प्रदेश का कोरोना हब बने इंदौर (Indore) में 20 से ज्यादा ऐसे केस सामने आए हैं जिनमें लोगों को कोविड वैक्सीन (Covid Vaccine) की दूसरी डोज लगने के बाद भी संक्रमण हो गया। स्वाथ्य विभाग द्वारा ऐसे संक्रमितों के सेंपल लेकर उनकी जीनोम सिक्वेंसिंग (Genome Sequencing) जांच के लिए पुणे भेजा जाएगा। इन लोगों की जांच के माध्यम से यह पता करने का प्रयास किया जाएगा कि कहीं इन लोगों को म्यूटेड वायरस के कारण तो संक्रमण नहीं हुआ। बता दें कि स्वाथ्य विभाग के अफसरों के मुताबिक कोविड वैक्सीन की दूसरी डोज लगने के 2 से 24 दिन के बाद कई स्वास्थकर्मी और पुलिसकर्मियों के कोरोना संक्रमित होने के मामले सामने आए हैं।

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इंदौर में बढ़ते कोरोना संक्रमितों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने वैक्सीनेशन की गति बढ़ा दी है। अब तक जिले में 2 लाख 47 हजार 489 लोगों को टीका लग चुका है। इनमें 45 हजार लोगों को कोविड वैक्सीन की दूसरी डोज भी लग चुकी है। इंदौर में अभी शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में 238 टीमों के माध्यम से टीकाकरण किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब टीकाकरण को और गति देने के लिए शहर के 15 और ग्रामीण क्षेत्र में 15 टीकाकरण केंद्र बढ़ाए जाएंगे। इंदौर में 1 अप्रैल से 45 वर्ष से अधिक के सभी लोगों को टीका लगाया जाना है, जिले में ऐसी 10 लाख आबादी है।

क्या होता है जीनोम सिक्वेंसिंग

कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन पिछले कोरोना वायरस से ज्यादा संक्रामक है। बताया जा रहा है कि यह स्ट्रेन 70 फीसदी ज्यादा संक्रामक है। जीनोम सिक्वेंसिंग एक तरह से किसी वायरस का बायोडाटा होता है। कोई वायरस कैसा है, किस तरह दिखता है, इसकी जानकारी जीनोम से मिलती है। इसी वायरस के विशाल समूह को जीनोम कहा जाता है। वायरस के बारे में जानने की विधि को जीनोम सीक्वेंसिंग कहते हैं। इससे ही कोरोना के नए स्ट्रेन के बारे में पता चला है।