मेडिक्लेम कंपनियों ने बरती कोताही तो होगी FIR और गिरफ्तारी, इंदौर कलेक्टर की कड़ी चेतावनी

इंदौर/आकाश धोलपुरे

आम दिनों में मनमाने तरीके से काम करने वाली मेडिक्लेम कंपनियों की मुश्किलें कोरोना काल मे बढ़ सकती है। दरअसल, इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह गुरुवार को साफ कह दिया है कि यदि मेडिक्लेम कंपनियों द्वारा क्लेम सेटल करने में कोताही बरती गई तो उन पर FIR दर्ज की जाएगी।

बता दें कि इंदौर में देश की टॉप मोस्ट मेडिक्लेम कंपनियां कार्यरत है। कोरोना संकटकाल के दौरान कई लोगों को क्लेम सेटल कराने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मेडिक्लेम पॉलिसी के लिए कंपनियों के पास अपनी हॉस्पिटल चैन होती है जहां कैशलेस सुविधा के चलते कई बीमारियों में निःशुल्क इलाज या आंशिक भुगतान किया जाना होता है। लेकिन कंपनियां इन दिनों पॉलिसी के बावजूद अस्पताल में एडमिट मरीजों की क्यूरी बढ़ा रही है जिसके चलते मरीजो व परिजनों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।

इस मामले में इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने कहा है कि मेडिक्लेम कम्पनियां क्लेम सेटल करने में देरी कर रही है जिसके चलते अस्पतालो पर दबाव पड़ रहा है, क्योंकि जब तक क्लेम सेटल नही हो जाता है तब तक मरीज अस्पताल का बेड नहीं छोड़ सकता है। ऐसे में गुरूवार को मेडिक्लेम कम्पनियों के प्रतिनिधियो की बैठक कर उन्हें निर्देशित किया गया है ऑनलाइन क्लेम सेटलमेंट में 2 घण्टे से ज्यादा का समय नही लगाएं नही तो कंपनी पर FIR  होगी और प्रतिनिधियो की गिरफ्तारी भी की जा सकती है। कलेक्टर मनीष सिंह ने स्टार हैल्थ मेडीक्लेम कंपनी की अनियमितता को लेकर उसे लताड़ भी लगाई। बता दे कि इंदौर में कोरोना का कहर जारी है और ऐसे में निजी अस्पतालों को ग्रीन और यलो ज़ोन में बांटा गया है। इस स्थिति में इलाजरत मरीजों और नए भर्ती किये जाने वाले लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नही कई मेडिक्लेम इंश्योरेंस कंपनियां तो देश के पीएम की अपील को नकारते हुए कोरोना के संकट के बीच यूनिट मैनेजर सहित अन्य लोगो पर ऑनलाईन पॉलिसी बिजनेस लाने का दबाव भी बना रही है, जिससे साफ होता है कि देश के लोगों से पैसा कमाने वाली कम्पनियां संकट के दौर में किस तरह से देश के लोगो से ही उगाही की मंशा में है। लेकिन ऐसे लोगों पर अब इंदौर प्रशासन की कड़ी निगाह है, और जरा भी लापरवाही करने पर उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।