कलेक्टर साहब, अस्पताल की इस “लूट और अमानवीयता” पर तो कार्रवाई कीजिए

जबलपुर, डेस्क रिपोर्ट।  जबलपुर में एक निजी अस्पताल का शर्मसार कर देने वाला वाक्या सामने आया है,अस्पताल की बकाया राशि न चुका सकने के कारण एक मरीज के शव को अस्पताल प्रबंधन ने बंधक बना लिया। कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद शव परिजनों को वापस दिया गया।

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कलेक्टर जबलपुर के सोशल मीडिया अकाउंट से जारी की गई ख़बर के अनुसार धनी की कुटिया, न्यू रामनगर, आधार ताल के रहने वाली महिला दुर्गेश चौहान को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। 50 वर्षीय महिला दुर्गेश को राइट टाउन स्टेडियम के पास स्थित महाकौशल अस्पताल में तीन दिन पहले भर्ती कराया गया था। मंगलवार को दुर्गेश की मृत्यु हो गई लेकिन मरीज के परिजनों के पास अस्पताल की शेष राशि 47000 रू चुकाने की व्यवस्था नहीं थी और इसलिए अस्पताल प्रबंधन ने मरीज के शव को बंधक बना लिया।

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महिला के परिवार में केवल दो बेटियां थी और आर्थिक हालात भी बदतर थी। ऐसे में महिला के पड़ोस में रहने वाली पुलिस आरक्षक मोहम्मद खान ने कलेक्टर कर्मवीर शर्मा द्वारा बनाए गए व्हाट्सएप नंबर पर मैसेज किया और घटना की जानकारी दी। कलेक्टर ने तत्काल डॉक्टर विभोर हजारी को इस मामले को निपटाने के आदेश दिए जो इस तरह के मामलों को निपटाने के लिए नोडल अधिकारी हैं। अस्पताल प्रबंधन ने तत्काल 47000 रू मे 37000 रू कम किए और शेष 10000 रू की राशि पुलिस कांस्टेबल के द्वारा जमा कराई गई। उसके बाद मृतक का शरीर परिजनों को सौंपा गया। हालांकि कलेक्टर के सोशल मीडिया अकाउंट पर इस तरह की कोई जानकारी नहीं है कि अस्पताल प्रबंधन पर क्या कार्यवाही की गई। लेकिन यहां एक सवाल यह भी पैदा होता है कि आखिरकार बिल की राशि इतनी कम कर ली गई तो जाहिर सी बात है कि बिल बढ़ा चढ़ा कर ही दिया गया था। साथ ही मृतका के शव को बंधक बनाने के बाद अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

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कोरोना काल अस्पतालो द्वारा मरीजो से ज्यादा बिल वसूलने की शिकायते निपटाने के लिए बिठाई गई कमेटी अभी तक अपनी रिपोर्ट नहीं दे पाई है और जबलपुर के इस अस्पताल का मामला तो सीधी सीधी लूट का ही है। कोई भी बिल अगर लगभग 75% से भी ज्यादा कम कर दिया जाता है तो साफ समझ में आता है कि आखिरकार मरीजों की गर्दन पर किस तरह छुरी चलाई जा रही है। जाहिर तौर पर सीधे-सीधे इस अस्पताल के खिलाफ मामला बनता है और जरूरत इस बात की है कि कलेक्टर प्रभावी कार्रवाई करते हुए अस्पताल के खिलाफ मामला दर्ज कराए।