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जबलपुर| भारतीय सेना को देश में बनी स्वदेशी धनुष गन को शुक्रवार को सौंप दिया गया है।  स्वीडन में बनी  बोफोर्स तोप  का स्वदेशी वर्सन धनुष गन को जबलपुर के गन कैरिज फैक्ट्री में स्वदेशी तकनीक से बनाया गया है।  धनुष गन को सेना में सौपने के बाद सेना की ताकत विदेशी देशो में और बढ़ गई है।भारत की सीमाओं पर अब जबलपुर की गन कैरिज फैक्ट्री में बनी धनुष गन ढहादेगी।   धनुष की दहाड़ से दुश्मनो के हौसले पस्त हो जायेंगे| 

155 एमएम इंडिजिनियस आर्टिलरी धनुष गन के सभी परीक्षण पुरे कर लिए गये है। धनुष गन बनाने का काम  2011 से शुरू हुआ था और 2014 में पूरा हुआ। काम पूरा होने के बाद धनुष गन का 4 साल तक  देश के विभिन्न स्थानों और अलग अलग वातावरण में परीक्षण  किया गया। धनुष गन ने अपने सभी परीक्षणों में सफलता हासिल की थी।  धनुष गन बोफोर्स तोप के बाद दुनिया की सबसे शक्तिशाली और आधुनिक उपकरणों से लैस है।  भारतीय सेना ने जबलपुर की गन कैरिज फैक्ट्री को 114 धनुष गन  निर्माण का आर्डर फरवरी 2019 में दिया था।  सेना ने 18 धनुष गन को पहले बनाकर देने के लिए जीसीएफ को कहा था जिसमे से 6 गन तैयार कर ली गयी है।  12 धनुष गनो को वर्ष 2020 में बनकर सेना को सौप दिया जाएगा।  जीसीएफ प्रबंधन ने बताया की भारतीय सेना को 414 धनुष गनों आवश्यकता है।  जीसीएफ जैसे जैसे सेना के आर्डर को पूरा करता जाएगा वैसे वैसे और आर्डर भी सेना फैक्ट्री को देगी।