जबलपुर| संदीप कुमार| लॉकडाउन खत्म होते ही मां नर्मदा की तस्वीर भी अपने पुराने स्वरूप में लौटने लगी। ढाई माह तक स्वच्छ और निर्मल रही नर्मदा एक बार फिर प्रदूषण की चपेट में आ गई है। जबलपुर में भी लॉक डाउन खुलते ही नर्मदा माँ को प्रदूषित करने वाले लोगों का घाटों में जमावड़ा लगने लगा है। पुनः नर्मदा नदी के घाटों में पूजा-पाठ का दौर भी शुरू हो गया है। लोग नहाने भी लगे हैं तो वही कपड़े धोने वालों की भी घाटों में लाइन लग गई है।

कोरोना वायरस के चलते लगे लॉक डाउन ने कुछ दिनों के लिए मां नर्मदा की तस्वीर पूरी तरह से बदल दी थी। मां नर्मदा के भक्त भी कहते थे कि इतना साफ और स्वच्छ नर्मदा जी का जल कभी नहीं देखा था। ऐसा लगता था कि मानो मां नर्मदा लॉक डाउन के समय पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त हो गई है पर जैसे ही लॉक डाउन खुला तो मां नर्मदा की तस्वीर अपने आप फिर बदल गई। कुछ स्थानीय लोगों ने घाटों पर प्रदूषण करने वाले लोगों को समझाने का प्रयास भी किया पर वो निसार्थक निकला। ऐसे में अब फिर मां नर्मदा अपने पुराने स्वरूप में जल्द ही आपको देखने मिलेगी।आगामी कुछ दिनों में आपको देखने मिलेगा की फिर से नर्मदा के घाटों में गंदगी और मां नर्मदा का जल प्रदूषित हो जाएगा।

लॉक डाउन के दौरान साधु-संतों ने जिला प्रशासन से की थी अपील
जिस समय लॉक डाउन लगा हुआ था उस समय मां नर्मदा के जल को देखते हुए साधु संतों ने जिला प्रशासन से अपील की थी कि जिस तरह से लॉक डाउन के समय मां नर्मदा के घाटों को स्वच्छ और मां के जल को साफ है उसी तरह से आगामी दिनों में भी अगर जिला प्रशासन चाहे तो ऐसा हो सकता है पर साधु-संतों के इस अपील पर जिला प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया।नतीजन एक बार फिर मां नर्मदा प्रदूषित होने की राह पर चल पड़ी है।

नर्मदा नदी में कपड़े धोना पहले से ही यहाँ प्रतिबंध..
नर्मदा नदी के सभी घाटों में जिला प्रशासन ने कपड़े धोने साबुन शैंपू का इस्तेमाल करने और पूजा की सामग्री विसर्जित करने पर प्रतिबंध लगा रखा था बावजूद इसके प्रशासन की नाक के नीचे यह सब होता रहा इसी बीच ग)कोरोना वायरस के चलते लॉक डाउन हुआ और ढाई माह में मां नर्मदा की तस्वीर पूरी तरह से बदल गई।अब एक बार पुनःलॉक डाउन जब खुल गया है तो प्रदूषण होने का सिलसिला फिर शुरू हो गया।

जल विशेषज्ञ की राय में कैसे बदला है माँ नर्मदा का स्वरूप,आप भी सुनिए…
जल विशेषज्ञ दुष्यंत शर्मा बताते है कि लॉक डाउन के समय नर्मदा नदी में जो (bod)बायो कैमिकल डिमांड की मात्रा थी वो अनुमानित 1 थी जबकि(cod)कैमिकल ऑक्सीजन डिमांड करीब 3 था।पर जैसे ही लॉक डाउन खुलता है और लोगो का नर्मदा के घाटों में आकर नहाने कपड़े धोने का सिलसिला शुरू होता है तो यही नर्मदा की (bod) और (cod) बढ़कर 2 से 3 और 7 से 9 पहुँच जाती है।यही वजह है कि लॉक डाउन के बाद नर्मदा का पानी का रंग बदल गया है।

लॉक डाउन के समय नर्मदा का हाल…
Bod …. 1 अनुमानित

cod…….3 अनुमानित

लॉक डाउन खुलने के बाद….

Bod……2 से 3 अनुमानित

Cod…..7 से 9 अनुमानित