निजी मेडिकल कॉलेजों की NRI सीटों का मामला, प्रमुख सचिव को HC में हाजिर होने के आदेश

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जबलपुर|  प्रदेश के निजी मेडीकल काॅलेजो मे चल रही काउॅन्सलिंग प्रक्रिया को हाईकोर्ट का आदेश बताकर रोके जाने के सरकार के फैसले को अदलत ने गंभीरता से लिया है|.मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले मे संचालक चिकित्सा शिक्षा समेत प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा को कल यानी शनिवार को कोर्ट मे हाज़िर होने के आदेश दिए है| कोर्ट ने  सवाल उठाते हुए सरकार से ये जवाब मांगा है कि जब 15 प्रतिशत एनआरआई कोर्ट के आरक्षण को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने यथास्थिति बनाने के निर्देश दिए थे| बावजूद इसके पूरी काउॅन्सिलिंग प्रक्रिया को रोक देना हाईकोर्ट के आदेश को गलत ढ़ंग से पेश करने जैसा है| 

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के निजी मेडीकल काॅलेजो मे 15 प्रतिशत एनआरआई कोटे के तहत दाखिलो पर प्रदेश सरकार ने सामान्य वर्ग के छात्रो को प्रवेश देने का आदेश दिया था| जिसे मेडीकल छात्रो ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायलय मे चुनौती दी थी| छात्रो की ओर से सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया गया था जिसमे 15 प्रतिशत आरक्षित सीटो को सिर्फ संबंधित वर्ग को देने का प्रावधान था| सुनवाई के बाद अदालत ने 30 अप्रैल को एनआरआई कोटे पर यथा स्थिति के आदेश दिए थे, लेकिन सरकार ने पूरी काउॅन्सिलिंग प्रक्रिया ही रोक दी…।

निजी मेडिकल कॉलेजों द्वारा राज्य शासन द्वारा उन में आरक्षित एनआरआई कोटे की सीटों पर सामान्य वर्ग में परिवर्तन कर सामान वर्ग के छात्रों को आवंटित किया जा रहा था | आज सुनवाई के दौरान जब राज्य शासन की ओर से एक सप्ताह का समय मांगा गया तो न्यायालय को अवगत कराए गया कि शासन द्वारा द्वितीय चरण की संपूर्ण काउंसलिंग को ही स्थगित कर दिया गया है| इस पर न्यायालय ने अत्यधिक रोष प्रकट किया कि स्थगन मात्र एन आर आई सीटों के संबंध में था ना कि संपूर्ण काउंसलिंग को स्थगित करने के, मेडिकल कॉलेजों की एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता एवं शुभम श्रीवास्तव ने पैरवी की| 

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