नर्मदा जयंती पर्व पर ओंकारेश्वर में प्लास्टिक से बने सवा लाख दोने नर्मदा को करेंगे प्रदूषित

ओंकारेश्वर (निप्र)। सुशील विधानी।

तात्कालिक शिवराज सिंह सरकार में नर्मदा जयंती पर होने वाले कार्यक्रमों के मद्देनजर अपर मुख्य सचिव, योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी श्री दीपक खाण्डेकर ने अनूपपुर, मण्डला, सिवनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद, सीहोर, रायसेन, हरदा, देवास, खण्डवा, बड़वानी, धार, अलीराजपुर, डिण्डौरी और खरगोन कलेक्टर से कहा था कि नर्मदा नदी की स्वच्छता बनाए रखने के लिए सभी घाटों पर सतत निगरानी बनाये रखे नर्मदा नदी में प्लास्टिक के दीप-दान पर रोक लगाते हुए पत्ते पर आटे के दीपदान का प्रचार-प्रसार प्रमुखता से कराने संबंधी आदेश पारित किये थें।
आगामी एक फरवरी शनिवार को पुण्य सलीला मां नर्मदा का जन्मोत्सव नर्मदा  जयंती सप्ताह के रूप में ओंकारेश्वर से लेकर नर्मदा जी के अनेक तटों पर नर्मदा जयंती  सप्ताह के रूप में मनाया जाएगा इसके 6 दिन पूर्व से ही नर्मदा नदी के तट पर आकर्षक मंच बनाकर विद्युत प्रकाश उसकी साज सज्जा भी की जाएगी तथा रोजाना संध्या काल में नर्मदा  जी का पूजन अर्चन अभिषेक के के साथ दीपदान एवं प्रसाद वितरण का आयोजन भी होंगे इन सारे आयोजन पर लाखो रुपए की धनराशि खर्च की जाएगी तथा अन्य तरह का दिखावा भी जाएगा यहां तक तो सब ठीक है लेकिन दीपदान के नाम पर डिस्पोजल निर्मित हजारों दोनों से नर्मदा में जो जल प्रदूषण बढ़ेगा उसकी चिंता नर्मदा जयंती मनाने वाले संगठन अथवा भक्त नहीं करते जबकि यह प्लास्टिक निर्मित धोने अनेक दिनों तक नर्बदा जल में पड़े रहकर  नर्मदा जी के जल को जी को प्रदूषित करते हैं।
इस संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार  ओंकारेश्वर तीर्थ नगरी को मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्लास्टिक मुक्त किया गया है इस के बावजूद इस संबंधी जिम्मेदार विभाग जिसमें ओंकारेश्वर नगर परिषद खंडवा जिला प्रशासन तथा मध्य प्रदेश प्रदूषण निवारण मंडल इसके लिए कोई जन जागरूकता अभियान नहीं चला रहे हैं एन वक्त पर सिर्फ दिखावे के लिए यह विभाग अपनी एक दिन की औपचारिकता बताकर अपने  जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेंगे एक लाख से अधिक डिस्पोजल निर्मित दोने नर्मदा नदी में छोड़े जाएंगे।

इस संबंध में सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अकेले ओंकारेश्वर मैं नर्मदा जयंती पर्व पर एक लाख से भी अधिक डिस्पोजल निर्मित दोनों में दीप दान किया जाएगा इसकी संख्या और भी अधिक बढ़ने की संभावना है इस तरह इस धार्मिक पर्व पर नर्मदा नदी के जल को स्वच्छ रखने के बजाय उसमें क्विंटल से प्लास्टिक वाला कचरा डाला जाएगा जिस की चिंता नर्मदा जयंती पर मनाने वाले विभिन्न संगठन तथा यजमान एवं भक्तगण भी नहीं करते यही स्थिति काकड़ा आरती की हे  जो धार्मिक विधान के विपरीत है जिससे वायु प्रदूषण भी फैलता है इसके बावजूद कोई भी इस स्थिति  के खिलाफ आवाज उठाने को तैयार नहीं है।

*अनुकरणीय उदाहरण अपनाने को कोई तैयार नहीं*

ओमकारेश्वर के मारकंडेय संयास आश्रम में नर्बदा जयंती पर्व पर नर्बदा जी में दीप दान करने के बजाए नर्मदा जी के तट पर मिट्टी से निर्मित चार हजार पांच  सो दीपकों को प्रज्वलित कर नर्बदा जी की आरती की जाती है तथा कार्यक्रम के पश्चात मिट्टी निर्मित यह दीपकों को पुनह संग्रह कर इन्हें पुन आग तपा कर इसका उपयोग किया जाता है इसके अलावा खेड़ी घाट  में आटे से निर्मित दीपकों से दीपदान किया जाता है यह अनुकरणीय उदाहरण है इससे एक तो नर्मदा जी काजल प्रदूषित नहीं होता तथा दूसरे आटे से निर्मित दीपक मछलियों के उपयोग मैं आ जाता है जब लाखों रुपए नर्मदा  जयंती के नाम पर खर्च किए जाते हैं तो दीपदान के प्रति नर्बदा जयंती मनाने वाले संगठन एवं यजमान तथा भक्तगण इस पर विचार क्यों नहीं करते जबकि यह गंभीर विषय है।
इस समय में महत्वपूर्ण तथ्य यह  भी है कि जिन संगठनों द्वारा भक्तों एवं यजमान द्वारा नर्बदा जी के किनारों पर एक दिन अथवा सप्ताह भर का जो आयोजन किया जाता है उसके बाद उस घाट या स्थान की साफ सफाई अथवा नर्बदा जी के जल को दूषित होने से कोई भी उपाय नर्मदा जयंती मनाने वाले यह लोग क्यों नहीं करते।

*30 वर्ष पुराने नर्मदा युवा संगठन अपना स्वयं का खंडहर हो रहा भवन लाखों रुपए प्रतिवर्ष एकत्रित करने के बावजूद उसका पुनर्निर्माण नहीं कर सका है और न  हीं संगठन का रजिस्ट्रेशन जिम्मेदार लोगो द्वारा अभी तक भी नहीं किया  यह विचित्र स्थिति है।*

नर्मदा नदी में डिस्पोजल के बजाय आटे से बने दिपक छोडे जाना चाहिए।डिस्पोजल के दोने से नर्मदा नदी में प्रदूषण बढता हैं सरकार स्वच्छ भारत अभियान चृला रही हैं और हम नर्मदा जी मे दिपदान के बहाने डिस्पोजल दोने का सैकड़ों क्विंटल कचरा डाल रहे हैं जो धार्मिक दृष्टि से भी ऊचित नही हैं।

पंडित अक्षय जोशी
सामाजिक कार्यकर्ता ओंकारेश्वर

एक तरफ हम नर्मदा को माँ का दर्जा देतें है और दुसरी तरफ उसी माँ पर जलता दिपक छोडते हैं जो धार्मिक दृष्टि से ऊचित नही हैं धार्मिक विधान में जिस भी देवी-देवता को दिपक लगाया जाता है वह दिपक भगवान् के सम्मुख रखा जाता है मस्तक पर नही। हम दो प्रकार की गलतियां कर रहे है एक तो जलता दिपक नर्मदा जी के उपर छोड रहे है डिस्पोजल के यह दोने में दिपक छोडने से नर्मदा नदी भी प्रदूषित हो रही हैं।